बरहट/जमुई: जिस भवन में गांव के बच्चों को किताबों के बीच बैठकर अपने भविष्य की नई इबारत लिखनी थी, वह वर्षों तक अधूरा पड़ा रहा। छत का काम पूरा नहीं हुआ, निर्माण कार्य बंद रहा और जिस पुस्तकालय को वर्ष 2022-23 में ही बच्चों को समर्पित किया जाना था, वह अब तक अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका। योजना मद से 4 लाख 36 हजार रुपये की निकासी के बावजूद पुस्तकालय भवन अधूरा रहने का मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन की सक्रियता से निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया है।
लेकिन निर्माण शुरू होते ही इस मामले में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने भवन निर्माण में इस्तेमाल हो रही ईंट और सीमेंट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि वर्षों की देरी के बाद अब बन रहे इस पुस्तकालय भवन की गुणवत्ता और मजबूती की निगरानी कौन करेगा?
बरहट के नूमर पंचायत में बनना था चार समुदाय पुस्तकालय
मामला जमुई जिले के बरहट प्रखंड की नूमर पंचायत के वार्ड संख्या 7 का है। यहां करीब 7 लाख 89 हजार रुपये की लागत से दो कमरे का चार समुदाय पुस्तकालय भवन बनाया जाना था।
योजना के अनुसार भवन का निर्माण वर्ष 2022-23 में पूरा कर बच्चों को सौंपा जाना था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी भवन अधूरा रह गया। लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रहने के कारण स्थानीय बच्चों को पुस्तकालय की सुविधा नहीं मिल सकी।
खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान
पुस्तकालय भवन के अधूरे रहने और योजना में कथित अनियमितता से संबंधित खबर 5 मई 2026 को AVN News में प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को अधूरे भवन का निर्माण जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया।
प्रशासन के निर्देश के बाद पंचायत सचिव सकलदेव पंडित की देखरेख में निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया है। लंबे समय से बंद पड़े भवन पर फिर से काम शुरू होने के बाद ग्रामीणों और बच्चों में उम्मीद जगी है कि अब पुस्तकालय जल्द पूरा हो सकेगा।
निर्माण शुरू होते ही ईंट और सीमेंट की गुणवत्ता पर सवाल
निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही ग्रामीणों ने इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन में कम गुणवत्ता वाली ईंट और सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन ने वर्षों से अधूरे पड़े भवन को पूरा कराने की पहल की है, तो निर्माण की गुणवत्ता की भी नियमित जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि सिर्फ भवन को जल्द पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
हालांकि, ग्रामीणों के इन आरोपों की आधिकारिक जांच और पुष्टि होना अभी बाकी है।
7.89 लाख की योजना, 4.36 लाख की निकासी और वर्षों की देरी हुआ
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल योजना की लागत, राशि की निकासी और निर्माण में हुई देरी को लेकर है।
पुस्तकालय भवन के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 7 लाख 89 हजार रुपये बताई गई है। वहीं, योजना मद से अब तक 4 लाख 36 हजार रुपये की निकासी हो चुकी है। इसके बावजूद भवन वर्षों तक अधूरा पड़ा रहा।
अब प्रशासन के निर्देश के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि शेष निर्माण कार्य किस गुणवत्ता के साथ और कितनी तेजी से पूरा कराया जाता है।
भवन अधूरा था तो लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर का इस्तेमाल कहां हुआ?
मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के बीच पुस्तकालय के लिए खरीदे गए लैपटॉप, बैट्री और इनवर्टर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब पुस्तकालय भवन ही लंबे समय तक अधूरा रहा, तो इन डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल कहां और किस रूप में किया जा रहा था?
ग्रामीणों की मांग है कि भवन निर्माण के साथ-साथ पुस्तकालय के लिए खरीदे गए संसाधनों की उपलब्धता, उपयोग और वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरी योजना की स्थिति स्पष्ट हो सके।
बच्चों को अब भी है पुस्तकालय पूरा होने का इंतजार
किसी गांव में पुस्तकालय सिर्फ चार दीवारों और छत का नाम नहीं होता। यह बच्चों और युवाओं को पढ़ने, सीखने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने का माध्यम होता है।
नूमर पंचायत में भी इसी उद्देश्य से पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया जा रहा था। लेकिन वर्षों तक भवन अधूरा रहने के कारण योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हुआ।
अब दोबारा निर्माण शुरू होने से स्थानीय लोगों की उम्मीद बढ़ी है। ग्रामीण चाहते हैं कि भवन जल्द पूरा हो, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाए।
ग्रामीणों की शिकायत पर होगी जांच: बीडीओ
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी अनिल कुमार मिस्त्री ने कहा है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि निर्माण में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत सही पाई जाती है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब गुणवत्ता जांच और जवाबदेही पर टिकी नजर
फिलहाल प्रशासन के निर्देश के बाद वर्षों से अधूरे पड़े पुस्तकालय भवन का निर्माण दोबारा शुरू हो गया है। लेकिन इसके साथ ही निर्माण की गुणवत्ता, खर्च हुई राशि और खरीदे गए संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल भी सामने आ गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराएगा? क्या वर्षों की हुई देरी के लिए जिम्मेदारी तय होगी? और क्या नूमर पंचायत के बच्चों को आखिरकार वह पुस्तकालय मिल पाएगा, जिसका इंतजार वर्ष 2022-23 से किया जा रहा है?

इन सवालों के जवाब जांच और निर्माण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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