बरहट, जमुई निज संवाददाता: सरकार द्वारा हर पंचायत में सामुदायिक पुस्तकालय भवन खोलने की महत्वाकांक्षी योजना बरहट प्रखंड क्षेत्र में धरातल पर उतरने से पहले ही फाइलों में सिमट कर रह गई है। अधिकांश पंचायतों में इस योजना की शुरुआत तक नहीं हो पाई है, जबकि जहां निर्माण कार्य शुरू हुआ, वहां भ्रष्टाचार और लापरवाही की तस्वीर सामने आ रही है।

नूमर पंचायत में अधूरा पड़ा पुस्तकालय भवन

बरहट प्रखंड के नूमर पंचायत के वार्ड नंबर 5 कटका मुसहरी में वर्ष 2022-23 में लगभग 7 लाख 89 हजार रुपये की लागत से दो कमरों का पुस्तकालय भवन निर्माण स्वीकृत हुआ था। यह योजना 15वें वित्त आयोग मद से संचालित की जा रही थी।

लेकिन करीब 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी भवन की छत का ढलाई नहीं हो सका है। केवल अधूरी दीवारें खड़ी हैं, जो अब धीरे-धीरे जर्जर होने लगी हैं। परिसर में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं, जिससे यह स्थान उपयोगहीन बन चुका है।

बरहट नूमर पंचायत में अधूरा सामुदायिक पुस्तकालय भवन
बरहट में लाखों की लागत से बनने वाला पुस्तकालय आज भी अधूरा!

शिक्षा का सपना टूटा, मवेशियों का बना ठिकाना

सरकार का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें किताबों व डिजिटल संसाधनों तक पहुंच देना था। लेकिन हकीकत इसके उलट है।

ग्रामीणों के अनुसार:

“जहां बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थी, वहां आज मवेशियों को बांधा जा रहा है।”

यह दृश्य न सिर्फ योजना की विफलता को दर्शाता है, बल्कि संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

राशि निकासी के बावजूद काम अधूरा

ग्रामीणों ने बताया कि इस योजना के तहत लगभग 4 लाख 36 हजार रुपये की राशि पहले ही निकाली जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
इस मामले में स्थानीय लोगों का आरोप है कि:

  • बिना काम पूरा किए राशि की निकासी की गई
  • यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत है

वार्ड सदस्य वरुण कुमार यादव ने इस संबंध में विभाग को लिखित आवेदन देकर जांच की मांग भी की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

डिजिटल संसाधनों की खरीद पर भी सवाल

मामला केवल भवन तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार पुस्तकालय के नाम पर:

  • लैपटॉप
  • बैट्री
  • इनवर्टर

की खरीदारी भी की गई है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब भवन ही तैयार नहीं हुआ, तो इन उपकरणों का उपयोग कहां हो रहा है?

ग्रामीणों का दावा है कि इन संसाधनों का कोई पता नहीं है, जिससे पूरे मामले में गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो गई है।

प्रशासनिक चुप्पी से बढ़े सवाल

अधूरा भवन, गायब संसाधन और अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना — ये सभी बातें प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती हैं। इससे यह योजना पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?

इस मामले पर प्रभारी पंचायत राज पदाधिकारी शशिकांत वर्मा ने कहा:

“हमें पहले इस मामले की जानकारी नहीं थी। अब इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

बरहट प्रखंड में योजना या लापरवाही का उदाहरण?

बरहट प्रखंड में सामुदायिक पुस्तकालय योजना की यह स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह योजना भी अन्य योजनाओं की तरह केवल कागजों में ही सिमट कर रह जाएगी।

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