Jamui: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के बीच बिहार के जमुई जिले का जिला यक्ष्मा केंद्र खुद बदहाल स्थिति में है। जमुई सदर अस्पताल परिसर में स्थित टीबी भवन जर्जर होकर मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए खतरा बन चुका है।
जर्जर भवन बना खतरा
सदर अस्पताल के दक्षिणी छोर पर स्थित यह सदर अस्पताल टीबी वार्ड पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।
- दीवारों से प्लास्टर गिरना आम बात हो गई है
- छत कमजोर हो चुकी है
- कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है
मरीज और कर्मचारी हर समय डर के साए में काम करने को मजबूर हैं।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है:
- छत से पानी टपकता है
- जरूरी दस्तावेज खराब होने का खतरा
- जीवनरक्षक दवाइयों के नष्ट होने की आशंका
यह हालात स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा करते हैं।
संक्रमण फैलने का खतरा
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन:
- उचित वार्ड की कमी है
- मरीजों को सामान्य वार्ड के पास बैठाया जाता है
- संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है
यह स्थिति अन्य मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है।
सफाई और रखरखाव की कमी
भवन की हालत इतनी खराब है कि:
- आसपास झाड़ियां उग आई हैं
- साफ-सफाई का अभाव है
- पूरा परिसर खंडहर जैसा दिखता है
प्रशासन की अनदेखी
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार:
- कई बार मरम्मत के लिए पत्र भेजा गया
- स्वास्थ्य विभाग पटना को सूचना दी गई
- अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
क्या कहते हैं अधिकारी?
एसीएस सह प्रभारी यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. अरविन्द कुमार ने बताया:
“जर्जर भवन को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को भी पत्र भेजा गया है। जल्द ही फिर से प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि भवन का निर्माण कराया जा सके।”
बड़ा सवाल: कैसे बनेगा टीबी मुक्त भारत?
जब इलाज का केंद्र ही असुरक्षित और जर्जर होगा, तो टीबी मुक्त भारत का सपना कैसे पूरा होगा?
यह स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को पूरी तरह से उजागर करती है।

