Jamui: जमुई जिला इन दिनों अपराधियों के हौसले और प्रशासन की खामोशी के बीच कराह रहा है। लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग दिन में भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे।
बीते शुक्रवार को मलयपुर थाना से महज 100 मीटर की दूरी पर 50 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट की घटना ने पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। रात करीब 9 बजे आधा दर्जन नकाबपोश बदमाशों ने एक स्वर्ण व्यवसायी से रुपये से भरा बैग लूट लिया। विरोध करने पर अपराधियों ने पिस्टल के बट से व्यवसायी के सिर पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया है।
हैरानी की बात यह है कि जिस दिन यह बड़ी लूट हुई, उसी दिन सिकंदरा में भी चोरों ने दो ज्वेलर्स की दुकानों को निशाना बनाते हुए करीब 10 लाख रुपये के जेवरात उड़ा लिए। यानी एक ही दिन में अपराधियों ने पुलिस को खुली चुनौती दे दी।
इसी बीच अपराध की आग और भड़काते हुए अपराधियों ने जमुई–सिकंदरा मुख्य मार्ग पर सरेशाम गोली मारकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी। 50 लाख की लूट का खुलासा भी नहीं हुआ था कि यह हत्या पूरे जिले में दहशत का नया अध्याय बन गई। अब हालात यह हैं कि दुकानदार शाम होते ही शटर गिराने को मजबूर हैं और आम लोग हर अनजान चेहरे से डरने लगे हैं।
जमुई एसपी विश्वजीत दयाल मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही एसपी विश्वजीत दयाल मौके पर पहुंचे और बाद में सदर अस्पताल जाकर घायल व्यवसायी से पूछताछ की। पीड़ित ने बताया कि वह कोलकाता से नकद रुपये लेकर सोने-चांदी के आभूषण लाया करते थे। इस वारदात में दो बाइक और एक ऑटो के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है।

पुलिस ने लूट मामले में कुछ लोगों से पूछताछ जरूर की है, लेकिन 60 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस उपमहानिरीक्षक के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया और बरहट, पुरानी बाजार व बोधवन तालाब इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। इस दौरान पांच युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि कुछ अहम सुराग मिले हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब थाना से चंद कदमों की दूरी पर 50 लाख की लूट हो जाती है, तो आम जनता खुद को कैसे सुरक्षित माने? क्या सरकार और प्रशासन सिर्फ घटनाओं के बाद बयान देने के लिए ही रह गए हैं? हर बार की तरह इस बार भी “जल्द खुलासा होगा” का भरोसा दिया जा रहा है, लेकिन ज़मीन पर डर, असुरक्षा और गुस्सा साफ नजर आ रहा है।
जमुई आज जवाब मांग रहा है—कब अपराधियों पर लगाम लगेगी?
कब व्यापारियों और आम लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा?
और कब कानून-व्यवस्था सिर्फ कागजों से निकलकर सड़कों पर दिखाई देगी?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक जमुई दहशत के साये में जीने को मजबूर रहेगा और सरकार पर उठते सवाल और भी तेज होते जाएंगे।
