पिछले पांच सालों में भारत में कितने सरकारी स्कूल बंद हुए? ये अकड़े होश उड़ा देंगे..,
यह लेख पर्याप्त तथ्यों और सरकारी आंकड़ों के आधार पर, जिसमें बताया गया है कि पिछले पांच सालों में भारत में कितने सरकारी स्कूल बंद हुए, इसके कारण, प्रभाव, राज्य-वार स्थिति और देश की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां:
भारत में पिछले पांच सालों में सरकारी स्कूल बंद: एक विश्लेषण
भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या में पिछले पांच वर्षों (2020–21 से 2024–25) के दौरान लगातार गिरावट देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल लगभग 18,727 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं — यानी इन स्कूलों में राज्य सरकारों/संघ प्रशासन ने स्थायी रूप से बंद या विलय कर दिया है।
आंकड़ों का सार (2020–21 से 2024–25)
कुल गिरावट
- 2020–21 में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या थी लगभग 10,32,049
- 2024–25 में यह घटकर लगभग 10,13,322 रह गई
- इसका अर्थ है कि लगभग 18,727 सरकारी स्कूल पाँच साल में बंद हुए।
यह गिरावट मान्य सरकारी स्रोत/UDISE+ डेटा पर आधारित है जो संसद में साझा किया गया था।
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क्यों सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं?
सरकारी स्कूलों के बंद होने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें मुख्य हैं:
- छात्रों की संख्या में गिरावट
कुछ इलाकों में बच्चों की संख्या कम हो रही है, जिससे स्कूलों में बहुत कम छात्रों का नामांकन रह जाता है — कई स्कूल “शील्ड्ड” स्थिति में आ जाते हैं।
- संसाधन “विलय/रैशनलाइजेशन” नीति
कुछ कम-एनरोलमेंट वाले छोटे स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों में विलय कर दिया जाता है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। इसे “स्कूल रैशनलाइजेशन” कहा जाता है।
- निजी स्कूलों का विस्तार
इसी दौरान निजी स्कूलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिसे कुछ परिवार बेहतर शिक्षा विकल्प मानते हैं।
क्या कहते है राज्य के अकड़े
पिछले पाँच वर्षों में स्कूल बंद होने की स्थिति सब जगह समान नहीं रही। कुछ प्रमुख बिंदु:
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है — करीब 6,900 स्कूल बंद हुए।
जम्मू और कश्मीर
इसके बाद जम्मू और कश्मीर में लगभग 4,380 स्कूल घटे।
ओडिशा, असम, हिमाचल प्रदेश
ओडिशा में लगभग 1,631, असम में 2,008, हिमाचल में लगभग 1,116 स्कूलों की संख्या कम हुई।
कुछ अन्य राज्य
कुछ राज्यों जैसे तेलंगाना व पश्चिम बंगाल में संवेदनशील रुझान देखा गया है: कई स्कूलों में निरंतर छात्र नामांकन कम होने से स्कूल “खाली” बैठे हैं — यानी शून्य छात्रों वाले स्कूल दसियों में हैं।
इसका प्रभाव क्या है?
ग्रामीण और गरीब वर्ग पर असर
सरकारी स्कूल खासकर ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए अहम होते हैं। इनका बंद होना बच्चों की शिक्षा तक पहुंच को कठिन कर सकता है क्योंकि निजी स्कूलों की फीस आम तौर पर अधिक होती है।
लंबी दूरी और खर्च
जब सरकारी स्कूल बंद होते हैं, तो कई बच्चों को दूसरे स्कूलों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है या निजी स्कूल की फीस जुगाड़नी पड़ सकती है।
नामांकन में गिरावट
सरकारी स्कूलों में नामांकन में गिरावट (जैसे कि कई स्कूलों में अब 0 या 10 से कम छात्र) यह संकेत देती है कि परिवार निजी विकल्पों की ओर जा रहे हैं या बच्चों को स्कूल भेजना रोक रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और बहस
- संसद में सांसदों ने चिंता जताई है कि सरकारी स्कूलों के बंद होने से शिक्षा की उपलब्धता और गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और सरकार को यह जानकारी साझा करने तथा रोशन नीति बताने के लिए कहा गया।
- सरकार का संकेत है कि स्कूलों के बंद/विलय का निर्णय अध्यापन क्षमता, नामांकन, आधारभूत सुविधाएँ और “रैशनलाइजेशन” जैसी जरूरतों के आधार पर राज्यों द्वारा लिया जाता है।
निष्कर्ष
- पिछले पाँच साल (2020–21 से 2024–25) में लगभग 18,727 सरकारी स्कूल बंद हो गए।
- यह गिरावट धीरे-धीरे हो रही है, और इसका असर ग्रामीण शिक्षा तक पहुंच पर प्रमुख रूप से दिख रहा है।
- निजी स्कूलों की संख्या बढने से शिक्षा के विकल्प बदल रहे हैं, लेकिन सभी परिवार निजी शिक्षा नहीं अपना सकते।
- सरकारी स्कूलों के बंद होने का बड़ा प्रभाव समान शिक्षा के अवसर पर पड़ सकता है।
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Note :-
Disclaimer: यह आर्टिकल व लेख और यह जानकारी मान्य सरकारी स्रोत/UDISE+ डेटा पर आधारित है जो संसद में साझा किया गया था।, इस आर्टिकल व लेख में हमारे द्वारा बताए गई जानकारी किसी भी त्रुटि या चूक के लिए आर्टिकल और प्रकाशक जिम्मेदार नहीं हैं।
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