नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग का कहना है कि बंगाल में मतदाता सूची सुधार के दौरान लगातार राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है, चुनाव अधिकारियों को धमकियां मिल रही हैं और कई जगह हिंसा तक की घटनाएं सामने आई हैं। EC के मुताबिक, अन्य राज्यों में SIR बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरी हो गई, लेकिन पश्चिम बंगाल में हालात बिल्कुल अलग हैं। यहां चुनाव अधिकारी डर और दबाव के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।

“काम करने की हालत में नहीं हैं चुनाव अधिकारी”

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि राज्य में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) और अन्य अधिकारियों को लगातार धमकाया जा रहा है। कई इलाकों में उन्हें शारीरिक हमलों का भी सामना करना पड़ा।

आयोग ने आरोप लगाया कि BLOs की शिकायतों पर स्थानीय पुलिस अक्सर FIR दर्ज करने से बचती रही। कई मामलों में जिला चुनाव अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही केस दर्ज हुए। EC ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया।

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बूथ लेवल ऑफिसर्स ने 24 नवंबर 2025 को कोलकाता स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर के दफ्तर का घेराव किया था

CEO ऑफिस पर हमला, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं

हलफनामे में 24 नवंबर 2025 की एक गंभीर घटना का जिक्र करते हुए EC ने बताया कि कोलकाता स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) के दफ्तर में प्रदर्शनकारियों ने जबरन घुसने की कोशिश की, पुलिस बैरिकेड तोड़े, दफ्तर में तोड़फोड़ की और अधिकारियों की आवाजाही रोक दी।
आयोग का कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

देश में अकेले बंगाल के CEO को मिली Y कैटेगरी सुरक्षा

चुनाव आयोग ने बताया कि खतरे के आकलन के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को Y कैटेगरी की सुरक्षा दी। आयोग के मुताबिक, वे देश के इकलौते चुनाव अधिकारी हैं जिन्हें इस स्तर की सुरक्षा दी गई है — जो खुद हालात की गंभीरता को दिखाता है।

7.08 करोड़ से ज्यादा काउंटिंग फॉर्म जमा

इन तमाम मुश्किलों के बावजूद भी आयोग ने बताया है कि BLOs ने 7.08 करोड़ से अधिक काउंटिंग फॉर्म जमा किए हैं, जो कुल का 92.40% है। वहीं, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों ने करीब 1.51 करोड़ नोटिस भी जारी किए।

EC ने कहा कि पात्रता तय करने और गलतियों को सुधारने के लिए नोटिस फेज बेहद अहम है और इसे बिना डर-दबाव के पूरा किया जाना वोटर लिस्ट की शुचिता के लिए जरूरी है।

“2025 की वोटर लिस्ट पर नहीं हो सकता चुनाव”

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बंगाल विधानसभा चुनाव में 2025 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। SIR के दौरान 58 लाख से ज्यादा मृत, स्थानांतरित और गैर-हाजिर वोटरों की पहचान की गई है। आयोग का कहना है कि अगर बिना सुधार के पुरानी सूची से चुनाव कराए गए तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: पारदर्शिता जरूरी, आम लोग न हों परेशान

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने EC से कहा था कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ वाली सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में चस्पा किए जाएं, ताकि लोग वहां दस्तावेज जमा कर सकें और आपत्तियां दर्ज करा सकें। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि करीब 1.25 करोड़ मतदाता इस सूची में शामिल हैं, जिनमें उम्र और माता-पिता के नाम से जुड़ी विसंगतियां पाई गई हैं।

ममता बनर्जी का आरोप– बंगाल को निशाना बना रहा है EC

SIR को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही हैं। 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो काम दो साल में होना था, उसे तीन महीने में करवाया जा रहा है। उनकी याचिका पर CJI सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा है।

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सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल SIR पर सुनवाई के दौरान CM ममता बनर्जी हाथ जोड़कर खड़ी हुई थीं।

“भाजपा शासित असम में SIR क्यों नहीं?”

3 फरवरी को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ममता ने कहा था कि चुनाव से ठीक पहले SIR क्यों कराया जा रहा है? बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम में चुनाव हैं, लेकिन SIR तीन राज्यों में हो रहा है — भाजपा शासित असम में नहीं। उन्होंने इसे ‘डबल इंजन राजनीति’ करार दिया।

काली शॉल पहनकर CEC से मिलीं ममता

2 फरवरी को ममता बनर्जी काली शॉल ओढ़कर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिली थीं। उनके साथ SIR से प्रभावित 13 परिवार और TMC नेता भी मौजूद थे।

मुलाकात के बाद ममता ने आरोप लगाया कि CEC का रवैया अहंकारी है और वे जमींदार की तरह बात करते हैं।

बड़ा सवाल: सुधार या सियासी टकराव?

एक तरफ चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुचिता की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य सरकार इसे राजनीतिक साजिश बता रही है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही SIR प्रक्रिया अब सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं रही — यह लोकतंत्र, भरोसे और संघीय ढांचे की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।

आने वाले दिनों में कोर्ट का फैसला तय करेगा कि बंगाल में वोटर लिस्ट का भविष्य क्या होगा — और क्या आम मतदाता इस सियासी रस्साकशी में राहत पाएगा या नहीं।

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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