एवीएन न्यूज डेस्क नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में दिल्ली से पटेल नगर विधायक और आम आदमी पार्टी कैबिनेट मंत्री राज कुमार आनंद से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) की यह छापेमारी शुक्रवार सुबह तक चली है और यह 9 अलग -अलग जगहों पर की गई है, जिसमें सिविल लाइंस क्षेत्र में विधायक राज कुमार आनंद का आवास भी शामिल है। अधिकारियों ने कहा है कि राजस्व और खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा दायर आरोप पत्र के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम ( प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत जांच के तहत उनके खिलाफ तलाशी ली गई है। फिलहाल ED (प्रवर्तन निदेशालय) को 22 घंटे की छापेमारी में उनके घर से क्या हासिल हुआ है यह जानकारी सामने अभी नहीं आई है।
मंत्री राजकुमार आनंद ने क्या कहा?
दिल्ली सरकार के मंत्री राज कुमार आनंद ने ED (प्रवर्तन निदेशालय) की कार्रवाई पर जवाब देते हुए कहा है कि छापेमारी सिर्फ लोगों को परेशान करने का एक बहाना है। उन्हें (ED) तलाशी के दौरान कुछ नहीं मिला है। उन्हें ऊपर से आदेश मिला है। मुझे लगता है कि इस देश में सच बोलना और गरीबों के लिए राजनीति करना पाप है। डीआरआई ने आरोप लगाया है कि राजकुमार आनंद ने कुछ वस्तुओं के आयात(Import ) में गलत घोषणाएं कीं, जिससे 7 करोड़ से अधिक की सीमा शुल्क चोरी हुई है। एजेंसियां कुछ हवाला लेनदेन की भी जांच कर रही हैं।
इस छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी दिल्ली के संयोजक गोपाल राय ने कहा है कि, ”कोई नोटिस नहीं, कोई केस नहीं, अचानक छापा पड़ गया. और उन्होंने कहा है कि “आप क्या करने का प्रयास कर रहे हैं? आप देश की एजेंसियों को कठपुतली बनाकर लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच भाजपा (BJP) ने कहा है कि सत्येन्द्र जैन के बाद राजकुमार आनंद दिल्ली के दूसरे मंत्री हैं जिन पर ईडी (ED ) ने छापा मारा है।

कौन हैं राजकुमार आनंद?
राजकुमार आनंद साल 2020 में पहली बार पटेल नगर विधान सभा सीट से विधायक बने थे। इससे पहले उनकी पत्नी वीना आनंद भी इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम की जगह राजकुमार आनंद कैबिनेट में शामिल किया गया था।

दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि, ”सीएम केजरीवाल ने एक बार कहा था कि मैं एक भी दागी विधायक को विधानसभा में नहीं बैठने दूंगा और आज स्थिति ऐसी है कि उन्हें अपने लगभग सभी विधायकों (MLAs) की सदस्यता समाप्त करनी पड़ेगी और खुद भी इस्तीफा देना पड़ेगा।”
