खैरा (जमुई)। खैरा प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए आवागमन का अहम रास्ता माना जाने वाला गिद्धेश्वर पुल अब क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के एक हिस्से के टूटने से गिद्धेश्वर और कुर्वाटांड के बीच आवागमन प्रभावित हो गया है। रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं, किसानों और नौकरी-पेशा लोगों की परेशानी अचानक बढ़ गई है। मजबूरी में लोगों को दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनके सफर में करीब 5 से 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी जुड़ गई है।
पुल टूटने से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
गिद्धेश्वर और कुर्वाटांड के बीच स्थित यह पुल दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते से बाजार, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए आवागमन करते थे।
पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब लोगों को वैकल्पिक मार्ग से होकर जाना पड़ रहा है। इससे न केवल समय और दूरी बढ़ गई है, बल्कि दैनिक यात्रियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा है।

छात्रों और दैनिक यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
पुल के क्षतिग्रस्त होने का सबसे अधिक असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। अतिरिक्त दूरी के कारण विद्यार्थियों को समय पर शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है।
वहीं, किसान और छोटे व्यापारी भी प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र से बाजार तक सामान पहुंचाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आने-जाने में अब पहले की तुलना में अधिक समय और खर्च लग रहा है।
344 लाख रुपये की लागत से बना था पुल
जानकारी के अनुसार, गिद्धेश्वर-कुर्वाटांड के बीच बना यह पुल करीब 22 वर्ष पहले जल संसाधन विभाग द्वारा 344 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था।
समय बीतने के साथ पुल की स्थिति लगातार जर्जर होती चली गई। पुल की खराब हालत को देखते हुए पहले ही इस पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद पुल की मरम्मत और रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे।
अब पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद इसकी उपयोगिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
नया पुल बन रहा, लेकिन पूरा होने में लगेगा समय
पुराने पुल के समानांतर एक नए पुल का निर्माण कार्य भी चल रहा है। हालांकि, नया पुल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने से दक्षिणी क्षेत्र के लोगों के सामने तत्काल आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक प्रशासन को लोगों की परेशानी को देखते हुए मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना चाहिए।
प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वैकल्पिक रास्ते की उचित व्यवस्था नहीं होने पर बरसात के मौसम में परेशानी और बढ़ सकती है।
लोगों ने मांग की है कि क्षतिग्रस्त पुल की स्थिति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाए और नए पुल के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि दक्षिणी क्षेत्र के लोगों को स्थायी राहत मिल सके।
22 साल पुराना पुल, अब उठ रहे रखरखाव पर सवाल
गिद्धेश्वर पुल का क्षतिग्रस्त होना केवल एक सड़क या पुल की समस्या नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक बुनियादी ढांचे के रखरखाव को लेकर भी सवाल खड़ा करता है। करोड़ों रुपये की लागत से बने महत्वपूर्ण पुल की समय-समय पर जांच, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी रही, यह अब चर्चा का विषय बन गया है।
जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दक्षिणी क्षेत्र के लोगों के लिए सुरक्षित, सुगम और कम दूरी वाला वैकल्पिक आवागमन सुनिश्चित करना है।
Written & Edit by : Chandan Patel

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