नगर परिषद कार्यालय के बाहर ही फैली गंदगी : जमुई शहर के 30 वार्डों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली नगर परिषद खुद गंदगी की गंभीर समस्या से जूझती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि नगर परिषद कार्यालय के बाहर ही कचरे का ढेर जमा है। सबसे अधिक गंदगी परिषद के सफाई वाहनों के आसपास देखी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इसी क्षेत्र के आसपास जिला एवं सत्र न्यायाधीश, उप विकास आयुक्त (डीडीसी), अपर समाहर्ता के सरकारी आवास और चिल्ड्रन पार्क भी स्थित हैं।
तीन एजेंसियों को सौंपी गई है सफाई व्यवस्था
जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र की सफाई व्यवस्था का जिम्मा तीन एजेंसियों – महिला निकेतन, दिव्यांग सेवा शरण और आनंद स्वच्छ प्राइवेट कंपनी—को दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने इन एजेंसियों पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी प्रियंका गुप्ता के कार्यकाल में इन्हें पुनः टेंडर प्रदान किया गया।

हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च, फिर भी उठ रहे सवाल
नगर परिषद द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था पर हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा विभागीय स्तर पर 16 सरकारी कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में सफाईकर्मियों की तैनाती भी की गई है। इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं दिख रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि सफाई पर खर्च की जा रही है, तो शहर में साफ-सफाई का स्तर कहीं अधिक बेहतर होना चाहिए था।
सफाईकर्मियों की संख्या और खर्च पर अधिकारियों ने नहीं दी कोई भी स्पष्ट जानकारी
जब नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी प्रियंका गुप्ता से सफाईकर्मियों की संख्या और मासिक खर्च के बारे में जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि जहां भी गंदगी की सूचना मिलेगी, वहां तत्काल सफाई कराई जाएगी। हालांकि उन्होंने सफाईकर्मियों की कुल संख्या और खर्च से संबंधित जानकारी साझा नहीं की।
वहीं नगर परिषद अध्यक्ष मोहम्मद हलीम उर्फ लोलो मियां ने भी सफाई व्यवस्था पर होने वाले खर्च और कार्यरत कर्मियों की संख्या की कोई जानकारी नहीं होने की बात कही।
उपाध्यक्ष और वार्ड प्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल
नगर परिषद उपाध्यक्ष नीतीश कुमार ने बताया है कि पहले लगभग 285 मजदूर सफाई कार्य में लगे हुए थे और इस पर करीब 58 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च होते थे। उन्होंने कहा है कि हाल ही में नया टेंडर हुआ है, लेकिन अब तक उन्हें नई व्यवस्था और वास्तविक खर्च का कोई भी आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
वार्ड पार्षद प्रतिनिधि गब्बर सिंह के अनुसार उनके वार्ड में आठ से नौ सफाईकर्मी कार्यरत हैं। वहीं वार्ड संख्या 26 के प्रतिनिधि गरीब मियां ने कहा कि वार्डों में जिस स्तर की सफाई होनी चाहिए, वैसी व्यवस्था कहीं नजर नहीं आ रही है। उन्होंने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
चिल्ड्रन पार्क के आसपास दुर्गंध से लोग परेशान
सबसे चिंताजनक स्थिति नगर परिषद कार्यालय और चिल्ड्रन पार्क के आसपास की बताई जा रही है। यहां कचरे का अंबार लगने से चारों और दुर्गंध फैल रही है। प्रतिदिन पार्क में बच्चे खेलने आते हैं, जबकि बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं।
गंदगी और बदबू के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी डर सता रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस क्षेत्र की नियमित सफाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ रही है।
त्रिपुरारी सिंह घाट मार्ग के पास भी बिगड़े हालात
स्थानीय लोगों के अनुसार पुरानी बाजार स्थित त्रिपुरारी सिंह घाट जाने वाली सड़क के समीप हालात और भी खराब हैं। आरोप है कि पीएचईडी विभाग की जमीन पर नगर परिषद द्वारा विभिन्न वार्डों से एकत्रित कचरे को प्रतिदिन डंप किया जा रहा है।
एक समय मॉर्निंग और इवनिंग वॉक के लिए प्रसिद्ध यह इलाका अब कचरे और दुर्गंध की वजह से लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत और विरोध के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
शहरवासियों ने मांगी जवाबदेही और स्थायी समाधान
नगर परिषद की सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शहरवासी अब पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सफाई पर हर महीने लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो उसका असर शहर की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर साफ दिखाई देना चाहिए।
फिलहाल नगर परिषद कार्यालय के बाहर फैली गंदगी और शहर के कई हिस्सों में कचरे के ढेर सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
Written & Edit by : Chandan Patel.
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