झाझा के पिछड़े इलाकों में पुल निर्माण की मांग ने पकड़ा जोर: झाझा प्रखंड के बाराकोला पंचायत अंतर्गत झाझा-परासी-दुधरवा-जुरपनिया-गोल्नीटांड़ पथ में बाल्हे बाबा नदी पर पुल निर्माण की मांग अब तेज होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां पुल बन जाता है तो झाझा से देवघर की दूरी करीब 20 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे हजारों ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
कभी नक्सल प्रभावित रहा था यह इलाका
बाराकोला पंचायत का यह क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। एक समय ऐसा था जब यहां गोलियों की आवाज गूंजती थी और नक्सलियों का प्रभाव काफी अधिक था। सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, ताकि लोग मुख्यधारा से जुड़ सकें और विकास का लाभ गांव तक पहुंचे।
हालांकि क्षेत्र में सड़क और कुछ पुलों का निर्माण हुआ है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बाल्हे बाबा नदी पर एक और पुल बन जाने से पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।
पुल बनने से दर्जनों गांवों को मिलेगा सीधा फायदा
ग्रामीणों के अनुसार इस पुल के निर्माण से दुधरवा, जुरपनिया, गोल्नीटांड़ समेत दर्जनों गांव सीधे पक्की सड़क मार्ग से जुड़ जाएंगे। इससे:
- विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज और परीक्षा केंद्र जाने में सुविधा होगी
- मरीजों को अस्पताल पहुंचने में राहत मिलेगी
- रेलवे स्टेशन आने-जाने में समय बचेगा
- व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- बरसात में आवागमन की बड़ी समस्या खत्म होगी
पहले से बने हैं दो पुल, तीसरे का इंतजार
ग्रामीणों ने बताया है कि परासी गांव के पास एक आरसीसी (RCC) पुल पहले से मौजूद है। वहीं नदी के दूसरी ओर भी लगभग ढाई वर्ष पहले एक और पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन अब लोगों की मांग है कि बाल्हे बाबा नदी पर तीसरा पुल भी जल्द बनाया जाए ताकि लोगो को जो परेशानी होती है वो नहीं होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पुल के बन जाने के बाद झाझा से चकाई, सोनो और देवघर तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
विकास की मुख्यधारा से अब भी दूर बाराकोला पंचायत
देश की आजादी के 78 वर्ष बाद भी बाराकोला पंचायत के कई गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आदिवासी, महादलित और पिछड़े समाज के लोग आज भी सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार गांव-गांव विकास पहुंचाने की बात करती है, लेकिन बाराकोला पंचायत के कई गांव आज भी पिछड़ेपन का दंश झेल रहे हैं।
ग्रामीणों ने क्या कहा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क और पुल जैसी सुविधाएं मिल जाएं तो गांव के लोग खुद अपने क्षेत्र को विकास की ओर ले जाएंगे। उनका मानना है कि यह पुल पूरे क्षेत्र के लिए “मील का पत्थर” साबित होगा।
विधायक दामोदर रावत ने क्या कहा
दामोदर रावत ने कहा कि यह योजना उनके प्रस्ताव में शामिल है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पहले से दो पुल और पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि सुदूर गांवों तक विकास की रोशनी पहुंचे और हर एक गांव सड़क मार्ग से जुड़े।

वर्ष 2023 में लगा था हेल्थ कैंप
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन एसपी डॉ. शौर्य सुमन के नेतृत्व में जुरपनिया गांव में जिला पुलिस प्रशासन द्वारा सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत हेल्थ चेकअप कैंप भी लगाया गया था।
झाझा के सुदूर ग्रामीण इलाकों को नई पहचान मिल सकती है
बाल्हे बाबा नदी पर पुल निर्माण केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि बाराकोला पंचायत के हजारों लोगों के जीवन को बदलने वाला कदम साबित हो सकता है। यदि सरकार इस मांग पर जल्द निर्णय लेती है तो झाझा के सुदूर ग्रामीण इलाकों को नई पहचान मिल सकती है।
