CBSE Board के टफ पेपर सेट की ईजी मार्किंग का आदेश जल्द ही आने वाला है? पता चली दो शर्तें..
CBSE Board : 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहे स्टूडेंट्स कुछ पेपर सेट के काफी डिफिकल्ट आने से बहुत दुखी है. उन सभी छात्रों के लिये अब खुशखबरी आने की ऐसी सम्भावना जताई जा रही है?. इन पेपर को लेकर पीआईएल दाखिल की जा रही है. मांग की जा रही कि सीबीएसई मार्किंग थोड़ी आसान करवा दें. क्या सच में सीबीएसई टीचरों से टफ पेपर की ईजी मार्किंग के लिए कह सकता है?
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CBSE के 10वीं बोर्ड का पहला गणित का पेपर इतना टफ आया था कि टीचर भी चौंक गए. स्टूडेंट्स ने कहा कि कुछ पेपर सेट का डिफिकल्टी लेवल आईआईटी के बराबर का था. ऑनलाइन पढ़ाने वाले कुछ टीचरों ने CBSE board से ईजी मार्किंग की अपील की है. यह बात जनहित याचिका तक पहुंच गई. ऐसा ही कुछ 20 फरवरी को 12वीं बोर्ड के फिजिक्स पेपर में हुआ. कुछ सेट काफी टफ आए थे. अब सवाल है कि क्या कुछ टीचरों या स्टूडेंट्स के कहने पर ईजी मार्किंग हो सकती है? इसमें दो शर्तें पता चली हैं जिनके आधार पर ईजी मार्किंग की संभावना रहती है. रितिक मिश्रा और प्रशांत किराड जैसे यूट्यूब टीचरों ने मोर्चा खोल रखा है. सबसे बड़ी बात कि एक पेपर सेट थोड़ा ईजी और दूसरा पेपर सेट टफ कैसे हो गया? अंदर की बात जानिए.
राजधानी दिल्ली के CBSE के एक कॉलेज में पढ़ाने वाले सीनियर टीचर ने बताया कि अलग-अलग डिफिकल्टी लेवल वाले पेपर सेट की कहानी क्या है. उन्होंने कहा कि CBSE ने देश और विदेश के अपने स्कूलों को अलग-अलग रीजन में बांट रखा है. जो पेपर सेट सप्लाई किए जाते हैं वो रीजन के हिसाब से अलग-अलग होते हैं. उसकी मुख्य वजह ये है कि अगर कहीं किसी भी प्रकार से पेपर लीक हो गया तो वह एक क्षेत्र तक ही रहेगा, पूरे देश को प्रभावित नहीं करेगा.
CBSE टीचर्स बताते हैं कि वैसे तो पेपर नेशनल लेवल पर सेट होता है लेकिन उसको रीजन के हिसाब से सर्कुलेट किया जाता है. सीबीएसई के पेपर तैयार करने का तरीका समझाते हुए उन्होंने कहा कि पहले ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है कि इस हिसाब से हमें पेपर बनाना है. फिर पेपर सेटर को बुलाया जाता है. जहां तक किसी सेट के ईजी होने या किसी सेट के टफ होने का सवाल है तो यह करीब-करीब लक व किस्मत पर ही निर्भर करता है. इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि यहां टफ पेपर भेजा जाए और वहां ईजी. CBSE इतना जरूर कहता है कि जहां तक संभव हो सके हर सेट का डिफिकल्टी लेवल एकसमान रखा जाए. इसके लिए पेपर सेट करने वाली टीम एक ही रखी जाती है, 1-2 लोगों का अंतर भले हो जाए.

कब ईजी मार्किंग के लिए कह सकता है सीबीएसई?
टफ पेपर आने के बाद अब क्या बच्चों के हित में ईजी मार्किंग हो सकती है? इस सवाल पर सीनियर टीचर ने कहा कि नहीं नहीं… देखिए पेपर सेट करने को लेकर कानूनी रूप से मुद्दा उठाया जा सकता है लेकिन ईजी मार्किंग की बात नहीं की जा सकती है. इतना जरूर है कि अगर सवाल सिलेबस से ही बाहर का है या कोई प्रश्न गलत आ गया तब सीबीएसई की ओर से औपचारिक निर्देश आता है कि इस सवाल को इस हिसाब से देखा जाए. टफ या ईजी को लेकर ऐसी कोई गाइडलाइंस सीबीएसई की ओर से टीचरों को नहीं दी जाती है.
यह साफ है कि पेपर टफ या ईजी होने पर कोई ऑर्डर CBSE से नहीं आता है, हां टीचर अपने हिसाब से देख ले तो अलग मुद्दा है.
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