छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर शिवनेरी किला में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए। देर रात से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे सुबह नजदीक आई, भीड़ का दबाव बढ़ता गया और हालात बेकाबू हो गए। अचानक अफरा-तफरी मच गई, जिससे महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग घायल हो गए।
संकरे रास्तों पर बढ़ा दबाव, हाथी दरवाजा और गणेश दरवाजा बने केंद्र
जानकारी के मुताबिक, अंबरखाना के नीचे मौजूद हाथी दरवाजा और गणेश दरवाजा जैसे संकरे रास्तों पर एकाएक भारी भीड़ जमा हो गई। रास्ते संकरे होने के कारण लोगों की आवाजाही बाधित हुई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ ही मिनटों में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, लेकिन फोर्स की कमी पड़ी भारी
घटना की सूचना मिलते ही पुणे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभालने की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल न होने के कारण शुरुआती समय में स्थिति गंभीर बनी रही। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जुन्नर तालुका क्षेत्र में इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपेक्षित संख्या में सुरक्षा बल तैनात नहीं थे।
शिवाजी जयंती पर प्रशासन की तैयारी पर उठे सवाल
हर वर्ष शिवाजी जयंती पर बड़ी संख्या में लोग शिवनेरी किले में पहुंचते हैं। इसके बावजूद भीड़ प्रबंधन को लेकर इस बार पर्याप्त तैयारी नहीं दिखी। घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों के लिए पहले से ही प्रवेश और निकास मार्गों की अलग-अलग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, मेडिकल टीम की तैनाती और अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत होती है।
भविष्य के लिए क्या हैं सुझाव?
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को सुझाव दिए हैं कि:
भीड़ नियंत्रण के लिए एडवांस प्लानिंग की जाए
सीमित संख्या में प्रवेश की व्यवस्था हो
संकरे रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जाए
सीसीटीवी और ड्रोन से मॉनिटरिंग की जाए
आपातकालीन चिकित्सा सहायता तत्काल उपलब्ध रहे।
श्रद्धा के उत्सव में सुरक्षा की चुनौती
छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती महाराष्ट्र में श्रद्धा और गौरव का प्रतीक है। लेकिन ऐसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की कमी कभी-कभी गंभीर हादसों को जन्म दे सकती है। जरूरत इस बात की है कि श्रद्धा के इस उत्सव को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

