बिहार के जमुई जिले से एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया जा रहा था, लेकिन एंबुलेंस में तेल खत्म हो जाने के कारण रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।

क्या है पूरा मामला?

मामला 24 अप्रैल 2026 का बताया जा रहा है। 75 वर्षीय धीरज रविदास की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। पहले उन्हें झाझा में प्राथमिक उपचार दिया गया, फिर जमुई सदर अस्पताल लाया गया। वहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें पटना रेफर कर दिया।
परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस जैसे ही सिकंदरा के पास पहुंची, उसका तेल खत्म हो गया। गाड़ी बीच सड़क पर ही बंद हो गई। चालक तेल लाने चला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। भीषण गर्मी और इलाज में देरी के कारण मरीज ने दम तोड़ दिया।

जमुई Jamui ambulance fuel खत्म होने से मरीज की मौत
इसी एंबुलेंस में हुई थी मरीज की मौत

सिस्टम की लाचारी या घोर लापरवाही?

यह सवाल अब हर किसी के मन में है –

  • क्या यह सिर्फ एक हादसा था या सिस्टम की घोर लापरवाही?
  • क्या एंबुलेंस बिना फ्यूल चेक किए ही रवाना कर दी गई?
  • क्या मरीज की जान की कोई भी कीमत नहीं?
  • क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं?

यह घटना बताती है कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही किसी की जान ले सकती है।

जमुई डीएम का सख्त रुख, FIR का आदेश

मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जमुई के जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए सभी दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द सौंपी जाए।

सिविल सर्जन ने मांगा जवाब

जमुई के सिविल सर्जन ने एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी एलेंसी जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड के क्लस्टर लीडर से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने साफ कहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई क्यों न की जाए।

जनता में गुस्सा, सिस्टम पर सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर इलाज मिलता, तो शायद धीरज रविदास आज जिंदा होते।

“सरकारी एंबुलेंस अगर रास्ते में ही दम तोड़ दे, तो मरीज क्या उम्मीद करे?” यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है।

क्या होगी आगे की कार्रवाई?

अब देखना होगा कि जांच में किन-किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है और क्या वास्तव में किसी पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

कब सुधरेगी व्यवस्था?

जमुई की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है। जब एंबुलेंस जैसी बुनियादी सेवा भी भरोसे के लायक नहीं रहे, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में सिर्फ कार्रवाई का दिखावा न करें, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार लाएं-ताकि किसी और की जान इस तरह की लापरवाही की भेंट न चढ़े।

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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