जमुई से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में न्याय की मजबूत मिसाल सामने आई है। विशेष पोक्सो कोर्ट ने मंगलवार को तीनों दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। यह फैसला विशेष पोक्सो न्यायाधीश महेश्वर दुबे की अदालत ने सुनाया।

दोषियों को मिली कड़ी सजा, अदालत का सख्त रुख

इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में मोहम्मद इमरान उर्फ चांद, मोहम्मद आफताब अंसारी और मोहम्मद सद्दाम हुसैन शामिल हैं। अदालत ने 37 पन्नों के विस्तृत फैसले में गवाहों के बयान, मेडिकल साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलों का गहन विश्लेषण करते हुए तीनों को दोषी करार दिया। अदालत का यह फैसला साफ संदेश देता है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कानून अब और ज्यादा सख्त रुख अपना रहा है।

दोषियों
तीनों दोषी सजा के वक्त कोर्ट में मौजूद

“दुर्लभतम” अपराध बताकर मांगी गई थी फांसी

सरकारी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने इस मामले को “दुर्लभतम श्रेणी” का बताते हुए दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं संजय कुमार और सत्यजीत कुमार ने अपने तर्क पेश किए। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि न्याय में संवेदनशीलता और कठोरता दोनों जरूरी हैं।

23 दिनों तक बंद कमरे में कैद रही नाबालिग

इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था। 1 दिसंबर 2025 को जमुई के अलीगंज बाजार से 15 वर्षीय नाबालिग लड़की लापता हो गई थी। करीब 23 दिन बाद, 24 दिसंबर 2025 को पुलिस ने उसे कटिहार के एक बंद कमरे से बरामद किया था। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि उसे अगवा कर कटिहार ले जाया गया, जहां लगातार 23 दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया। उसने बताया कि मोहम्मद इमरान उसे अलीगंज से लेकर गया, जहां इमरान और आफताब ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे सद्दाम के हवाले कर दिया गया।

मां को दी गई थी धमकी, टूटा परिवार का हौसला

इस दौरान पीड़िता की मां को धमकी भरे फोन कॉल भी किए गए। कॉल में कहा गया कि उनकी बेटी अब वापस नहीं आएगी। एक मां के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो सकता है—हर पल डर, अनिश्चितता और बेबसी। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक परिवार के टूटते हौसले और समाज की संवेदनाओं की भी कहानी है।

पुलिस की तत्परता से जल्द हुई गिरफ्तारी

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच को प्राथमिकता देते हुए साक्ष्य जुटाए गए और केस को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

स्पीडी ट्रायल: दो महीने में मिला न्याय

इस मामले में न्याय की गति भी चर्चा का विषय बनी।

17 जनवरी 2026: चार्जशीट दाखिल
22 जनवरी: कोर्ट ने संज्ञान लिया
27 जनवरी: गवाही शुरू
19–28 फरवरी: बहस
16 मार्च: दोषी करार
24 मार्च 2026: सजा सुनाई गई

महज दो महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर सजा सुनाना न्यायपालिका की सक्रियता को दर्शाता है।

किन धाराओं में हुई सजा

अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 96 और पोक्सो एक्ट की धारा 6 व 17 के तहत सजा सुनाई। इन धाराओं में कड़ी सजा का प्रावधान है, जिसमें मृत्युदंड से लेकर आजीवन कारावास तक शामिल है।

न्याय का संदेश: अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं

यह फैसला सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए अब कोई नरमी नहीं होगी। इस फैसले ने यह उम्मीद भी जगाई है कि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकता है और कानून उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

दर्द से न्याय तक की कहानी

यह कहानी सिर्फ एक अदालत के फैसले की नहीं, बल्कि एक बेटी के साहस, एक मां के संघर्ष और न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी की है।

अंततः यह फैसला उस भरोसे को मजबूत करता है कि चाहे अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो—न्याय की रोशनी एक दिन जरूर पहुंचती है।

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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