बरहट/जमुई | बरहट सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है, इसका जीता-जागता उदाहरण प्रखंड के बरियारपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय देवाचक में देखने को मिल रहा है। यहां शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है और जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन हैं।

2 साल से अधूरा पड़ा है स्कूल भवन

बताया जाता है कि करीब दो साल पहले जर्जर स्कूल भवन को मरम्मत के नाम पर तोड़ दिया गया था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि जल्द ही नया और सुरक्षित भवन बनकर तैयार होगा। लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। जिम्मेदार विभाग और अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।

महज 2 कमरों में सिमटी पढ़ाई

वर्तमान स्थिति यह है कि पूरे विद्यालय यानी स्कूल की पढ़ाई केवल दो कमरों में सिमट गई है। इन कमरों में सिर्फ कक्षा 1 और 2 के छोटे बच्चों की पढ़ाई किसी तरह कराई जा रही है। वहीं, कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों को पास के प्लस टू उत्क्रमित उच्च विद्यालय देवाचक में शिफ्ट कर दिया गया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

अधूरा निर्माण और बदहाल व्यवस्था

ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय यानी स्कूल में पहले कुल 7 कमरे थे। मरम्मत के दौरान दो कमरों को पूरी तरह ढहा दिया गया और बाकी कमरों को जर्जर हालत में छोड़ दिया गया। संवेदक द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन बीच में ही काम बंद कर दिया गया। आज स्थिति यह है कि केवल दो अधूरे कमरे ही बच्चों की पढ़ाई का सहारा हैं।

स्कूल
अधूरा निर्माण और बदहाल व्यवस्था

बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव

  • विद्यालय में सिर्फ भवन की ही समस्या नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है।
  • स्कूल परिसर में गंदगी और मल-मूत्र फैला रहता है
  • शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है
  • बाउंड्री वॉल का अभाव है,जिससे मवेशियों और बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता है

इसका सबसे ज्यादा असर छात्राओं और महिला शिक्षकों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।

रेलवे लाइन से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा

विद्यालय के पास से रेलवे लाइन गुजरती है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा खतरा बना रहता है। बिना बाउंड्री वॉल के यह जोखिम और बढ़ जाता है।

ग्रामीणों की शिकायतें, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार शिक्षा विभाग और अधिकारियों को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। विभागीय लापरवाही के कारण न तो निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ और न ही कोई स्थायी समाधान निकाला गया।

प्रधानाध्यापक ने भी जताई चिंता

विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण दिवाकर ने बताया कि विभाग द्वारा टेंडर के माध्यम से मरम्मत कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन यह कार्य क्यों अधूरा रह गया इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं है। उन्होंने कहा कि बच्चों को फिलहाल पास के उच्च विद्यालय में पढ़ाया जा रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

शिक्षा पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल

इस मामले में जब प्रखंड प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी सुधांशु कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। इससे विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिक्षक संघ ने भी लगाए गंभीर आरोप

प्रारंभिक शिक्षक संघ की प्रखंड इकाई पहले ही प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठा चुकी है।
संघ ने जनवरी माह में जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन देकर सुधांशु कुमार को पद से हटाने की मांग की थी।
आरोप है कि निरीक्षण के दौरान शिक्षकों पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है, जिससे शिक्षकों में भय और असंतोष का माहौल है। इसका असर सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

दोहरी जिम्मेदारी पर उठे सवाल

गौरतलब है कि वर्तमान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी को ही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या एक ही अधिकारी दोहरी जिम्मेदारी के साथ शिक्षा व्यवस्था को पर्याप्त समय और प्राथमिकता दे पा रहे हैं?

कब सुधरेगी व्यवस्था?

उत्क्रमित मध्य विद्यालय देवाचक की स्थिति शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक बच्चे इस बदहाल व्यवस्था में पढ़ने को मजबूर रहेंगे और जिम्मेदार अधिकारी कब अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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