चैती छठ से पहले बिहार और झारखंड में फलों की कीमतों में उछाल, व्रतियों की बढ़ी चिंता..
Chaiti chhath puja fruit price hike Bihar in Jharkhand: बिहार और झारखंड में आस्था और श्रद्धा का महापर्व “चैती छठ” नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है, लेकिन इस बार व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक नई चिंता खड़ी हो गई है—फलों की बढ़ती कीमतें। छठ पूजा में फलों का विशेष महत्व होता है, और बिना इनके यह पर्व अधूरा माना जाता है। ऐसे में कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
व्यापारियों के अनुसार, इस बार फलों की आपूर्ति में कमी और मांग में अचानक बढ़ोतरी मुख्य कारण है। छठ पूजा के दौरान केला, सेब, नारियल, संतरा, अनार और गन्ना जैसे फलों की खपत कई गुना बढ़ जाती है।
- मौसम में बदलाव के कारण कुछ फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
- परिवहन लागत में वृद्धि ने भी दाम बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
- बाहर से आने वाले फलों पर निर्भरता अधिक होने के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
किन फलों के दाम में ज्यादा उछाल?
इस समय बाजार में सबसे ज्यादा असर इन फलों पर देखा जा रहा है:
- केला: जो पहले 40-50 रुपये दर्जन मिलता था, अब 70-80 रुपये तक पहुंच गया है।
- सेब: 120-150 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 180-220 रुपये प्रति किलो हो गया है।
- नारियल: एक नारियल 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये तक बिक रहा है।
- संतरा और अनार: इनकी कीमतों में भी 20-30% तक की बढ़ोतरी हुई है।
व्रतियों की बढ़ी परेशानी
छठ व्रत रखने वाले लोग शुद्धता और परंपरा का विशेष ध्यान रखते हैं, इसलिए वे फलों की गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते। बढ़ती कीमतों के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। कई लोग कम मात्रा में फल खरीदने या सस्ते विकल्प तलाशने को मजबूर हैं।
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दूसरे राज्यों से आ रही है आपूर्ति
बाजार में उपलब्ध फलों की आपूर्ति मुख्य रूप से अन्य राज्यों से हो रही है. केला पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से आ रहा है. अनार गुजरात और राजस्थान से मंगाया जा रहा है. आम आंध्र प्रदेश से, अंगूर महाराष्ट्र के शोलापुर से और मौसमी नागपुर से बिहार पहुंच रही है.
महंगाई के पीछे की वजहें
व्यापारियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार फलों की कीमतों में 50 से 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. इसके पीछे डीजल की बढ़ती कीमतें और मजदूरी लागत में इजाफा मुख्य कारण हैं. परिवहन खर्च बढ़ने से इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ा है.
व्यापारियों का क्या कहना है?
व्यापारियों का कहना है कि वे जानबूझकर कीमतें नहीं बढ़ा रहे, बल्कि उन्हें खुद महंगे दाम पर माल मिल रहा है। उनका कहना है कि अगर सप्लाई सामान्य हो जाए तो कीमतें भी अपने आप कम हो जाएंगी।
प्रशासन और सरकार की भूमिका
कुछ जगहों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा बाजारों की निगरानी की जा रही है ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके। हालांकि, अभी तक कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार को इस समय आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए।
क्या है आगे की उम्मीद?
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आएगा, मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों में और हल्की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, अगर आपूर्ति में सुधार होता है तो कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
निष्कर्ष:
चैती छठ जैसे पवित्र पर्व पर फलों की बढ़ती कीमतें व्रतियों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। आस्था और परंपरा के बीच लोग अपनी क्षमता के अनुसार संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है कि प्रशासन और बाजार की स्थिति में सुधार के साथ श्रद्धालुओं को कुछ राहत मिलेगी और वे पूरे उत्साह के साथ इस महापर्व को मना सकेंगे।
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Note :-
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