CBSE मार्किंग… 10वीं बोर्ड में मैथ्स के पेपर का मुद्दा गरमाया, अब टीचर्स लगाएंगे जनहित याचिका..
CBSE के 10वीं बोर्ड एग्जाम में मैथ्स स्टैंडर्ड और कुछ सेट के बेसिक मैथ्स के पेपर भी बच्चों के लिए किसी झटके से कम नहीं रहे. स्टूडेंट्स का कहना है कि लाखों बच्चे NCERT से पढ़ते हैं लेकिन लेवल तो आईआईटी वाला था शायद. एजुकेटर रितिक मिश्रा ने पीआईएल दाखिल करने की बात कही है.
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CBSE board की 10वीं परीक्षा का पहला गणित का पेपर ऐसा आया कि बच्चे यूपीएससी, JEE और दूसरी परीक्षाओं से तुलना करने लगे. ऐसे ही एक ऑनलाइन टीचर और स्टूडेंट्स के ‘रितिक भैया’ ने शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई से बड़ी मांग रखी है. उन्होंने 10वीं के परीक्षार्थियों की ओर से बनाए एक वीडियो में अपील की है कि 17 फरवरी का मैथ्स एग्जाम देने के बाद बहुत सारे बच्चों ने ये फील किया कि पेपर का लेवल बहुत डिफिकल्ट और पेपर बहुत लंबा था. रितिक ही नहीं, यूट्यूब पर पढ़ाने वाले प्रशांत किराड ने भी स्टूडेंट्स को बताया है कि वह पीआईएल (जनहित याचिका) फाइल करने जा रहे या कर चुके हैं.
उन्होंने CBSE को संबोधित करते हुए कहा कि मैं ये नहीं कह सकता कि पेपर कैसा होना चाहिए, कैसा नहीं लेकिन मैं कुछ प्वाइंट्स आपके सामने रखना चाहता हूं. मेरा सवाल है-
- अगर आपको पेपर डिफिकल्ट बनाना ही था तो जो आप रिफरेंस बुक फॉलो करने के लिए बोलते हैं जो कि एनसीईआरटी है, आप उसके लेवल को थोड़ा बढ़ा सकते थे लेकिन NCERT का जो लेवल है और जो पेपर आया है उसमें जमीन का आसमान का फर्क है.
- बच्चा तो NCERT को सबकुछ मानकर पढ़ता है कि इसके आसपास ही प्रश्न आएंगे, इससे अलग क्या आएगा? लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
- आप बोर्ड एग्जाम के 2 महीने पहले जो सैंपल पेपर रिलीज करते हैं, उसके लेवल को बढ़ा सकते थे. लेकिन आपका जो सैंपल पेपर है और जो बोर्ड एग्जाम का पेपर आया है दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है. बच्चा तो सैंपल पेपर देखकर यही समझता है न कि इस साल का पेपर ऐसे पूछा जा सकता है.
- बच्चा सालभर मेहनत कर रहा है कि पहला बोर्ड एग्जाम है. प्रेशर के बीच 100 में से 100 लाने की सोच रहा है. ऐसा पेपर देखकर तो वो डर जाएगा ना, जो प्रश्न उसने कहीं नहीं देखे. उसकी पूरी मेहनत बेकार जाएगी.
- आप अलग-अलग सेट देते हैं. किसी के पास ए, किसी के पास बी, ऐसे शायद 20 से ज्यादा सेट होते हैं. इस बार ऐसा देखा गया कि अलग-अलग सेट के पेपर में डिफिकल्टी लेवल बिल्कुल अलग है. ये कैसा जस्टिस है? मतलब किसी बच्चे के पास ऐसा पेपर आया जिसमें NCERT से सवाल थे, सैंपल पेपर से सवाल थे. पिछले साल के प्रश्न थे. दूसरी तरफ बहुत सारे बच्चों को ऐसा पेपर मिला जो न NCERT में है, न पिछले साल आए, न सैंपल पेपर में. थोड़ी देर बाद परीक्षा देकर अगर ये बच्चा एक ऐसा पेपर देखता है जो कि बहुत सरल है तो वह डिमोटिवेट फील करेगा.
एजुकेटर रितिक मिश्रा ने 21 फरवरी की रात में जारी वीडियो मैसेज में कहा कि कुछ जगहों पर तो बेसिक मैथ्स का लेवल भी स्टैंडर्ड की तरह था. मेरा सवाल है कि जब बच्चे का मैथ्स इतना अच्छा होता तो वह बेसिक क्यों लेता? उन्होंने मिनिस्ट्री और सीबीएसई से बच्चों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की अपील की है क्योंकि यह बच्चों की एक वास्तविक चिंता है.
गणित का पेपर हो गया, अब मार्किंग में…
एजुकेटर- रितिक मिश्रा ने अपील की है कि CBSE नॉर्मलाइजेशन पॉलिसी लागू कर सकता है. ये एनटीए भी फॉलो करता है जब वह JEE-मेंस का पेपर कराता है. आप डिफिकल्ट सेट मिलने वाले स्टूडेंट्स को अच्छे मार्क्स दे सकते हैं.
- उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के पास डिफिकल्ट सेट आ गया है उनके पेपर की चेकिंग में थोड़ी नरमी बरती जाए और ग्रेस मार्क्स दिया जाए.
- सबसे जरूरी बात, आप पेपर डिफिकल्ट बनाइए. अच्छी बात है. बच्चा रटकर नहीं जाएगा कि कहीं से भी प्रश्न आ सकते हैं लेकिन आप अलग-अलग सेट का डिफिकल्टी लेवल एकसमान रखिए.
दरअसल, 10वीं के बोर्ड का दूसरा पेपर अंग्रेजी का भी हो चुका है लेकिन बच्चों की गणित की चिंता कम नहीं हो रही है. लाखों बच्चे सोशल मीडिया पर कैंपेन चला रहे हैं.
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Note :-
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