महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 अब आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बताया कि यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है।

हालांकि, इस फैसले ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—जब संसद में इससे जुड़े संशोधन विधेयकों पर अभी चर्चा चल ही रही है, तो इसे लागू करने की इतनी जल्दी क्यों दिखाई गई?

2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को मिली थी मंजूरी

दरअसल, सितंबर 2023 में संसद ने इस कानून को पारित किया था, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य है:

  • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना
  • राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
  • निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करना

इसे देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था।

फिर भी 2029 से पहले क्यों नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ?

यह सबसे अहम सवाल है। कानून लागू होने के बावजूद महिलाओं को इसका फायदा तुरंत नहीं मिलेगा।

इसके पीछे वजह है:

  • यह कानून जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है
  • अगली जनगणना 2027 में प्रस्तावित है
  • उसके बाद ही परिसीमन (सीटों का पुनर्निर्धारण) होगा

यानी जब तक नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीटों का बंटवारा नहीं होगा, तब तक आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। इसी वजह से माना जा रहा है कि इसका असली फायदा 2029 के आम चुनाव से ही मिल पाएगा।

संसद में चल रही है बड़े बदलावों की तैयारी

वर्तमान में संसद के विशेष सत्र में तीन अहम विधेयकों पर चर्चा जारी है:

  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
  • परिसीमन संशोधन विधेयक, 2026
  • केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2026

इन प्रस्तावों के तहत:

  • लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 543 से 850 करने की योजना है
  • परिसीमन के लिए जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा
  • 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव है

पीएम मोदी का बयान: ‘यह महिलाओं का हक है’

महिला आरक्षण से जुड़े संशोधनों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा:

“हम देश की नारी शक्ति को उनका हक दे रहे हैं। दशकों से जो अधिकार रोका गया, आज उसे देने का अवसर है। यह हमारे लिए प्रायश्चित का समय है।”

उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

अमित शाह ने दक्षिण राज्यों की चिंता पर दिया जवाब

गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के उस आरोप को खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि नए विधेयकों से दक्षिण भारत की सीटें कम हो जाएंगी।

उन्होंने स्पष्ट किया:

  • अभी दक्षिण राज्यों की 129 सीटें हैं
  • परिसीमन के बाद यह बढ़कर 195 सीटें हो जाएंगी
  • तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 हो सकती हैं
महिला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में

राजनीति में महिलाओं के लिए नया दौर, लेकिन इंतजार अभी बाकी

महिला आरक्षण कानून का लागू होना निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक कदम है। इससे देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और नीति-निर्माण में उनका प्रभाव मजबूत होगा।

लेकिन हकीकत यह भी है कि:

  • कानून लागू हो चुका है
  • पर इसका फायदा अभी दूर है
  • महिलाओं को अपने हक के लिए 2029

तक इंतजार करना पड़ेगा, जो इस ऐतिहासिक फैसले की सबसे बड़ी चुनौती भी है।

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