लोकतंत्र का चौथा स्तंभ: आज जब देश बेरोज़गारी, महंगाई, किसानों की बदहाली, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की गिरावट जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है — तब सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश की नामी मीडिया हाउस आखिर कर क्या रही है?

जिस मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, वही मीडिया आज सत्ता के सामने नतमस्तक दिखाई देती है। सरकार से सवाल पूछने की जगह, दिन-रात विपक्षी दलों को कटघरे में खड़ा करने का काम कर रही है।

क्या यही पत्रकारिता है?

पहले मीडिया जनता की आवाज़ होती थी। घोटालों को उजागर करती थी, सत्ता से जवाब मांगती थी, गरीब-मज़दूर-किसान की पीड़ा दिखाती थी।

आज हालत यह है कि टीवी खोलते ही वही बहस —

“विपक्ष ने ये क्यों कहा?”
“विपक्ष ने वो क्यों किया?”
लेकिन सरकार से कोई नहीं पूछता—
पेट्रोल-डीजल इतने महंगे क्यों हैं?
युवाओं को नौकरी क्यों नहीं मिल रही?
किसानों की आमदनी क्यों नहीं बढ़ी?
शिक्षा और स्वास्थ्य बजट क्यों घट रहा है?

बड़े उद्योगपतियों का कर्ज़ माफ और आम आदमी पर टैक्स क्यों?

लगता है जैसे मीडिया ने सरकार से सवाल पूछने का साहस ही खो दिया है।

आज की प्राइम टाइम डिबेट असल मुद्दों पर नहीं, बल्कि धर्म, जाति, बयानबाज़ी और विपक्षी नेताओं की व्यक्तिगत आलोचना पर चलती है। सत्ता की नाकामियों को छुपाने के लिए जनता का ध्यान भटकाया जाता है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति है। कई बड़े मीडिया हाउस आज कॉरपोरेट और राजनीतिक गठजोड़ का हिस्सा बन चुके हैं। विज्ञापन, टीआरपी और सत्ता की नज़दीकी ने पत्रकारिता की आत्मा को गिरवी रख दिया है। जो एंकर कभी तीखे सवाल पूछते थे, आज वही सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करते नज़र आते हैं।

आज
फाइल फोटो: पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी

यह सिर्फ मीडिया का पतन नहीं — यह लोकतंत्र का पतन है।

जब मीडिया बिक जाती है, तब जनता अंधेरे में चली जाती है।
जब सवाल मर जाते हैं, तब तानाशाही जन्म लेती है।
देश बर्बादी की राह पर तभी जाता है, जब सत्ता निरंकुश हो जाए और मीडिया उसका भजन मंडली बन जाए।
आज ज़रूरत है जागने की। जनता को समझना होगा कि कौन सच दिखा रहा है और कौन प्रोपेगेंडा फैला रहा है। स्वतंत्र पत्रकारिता को समर्थन देना होगा। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही आधी-अधूरी खबरों से बचना होगा।

मीडिया को भी आत्ममंथन करना होगा—क्या वह जनता के साथ खड़ी है या सत्ता के चरणों में?

इतिहास गवाह है — जो मीडिया सत्ता की दलाली करती है, वह अंततः जनता की नज़रों में गिर जाती है।

अब भी वक्त है।
सवाल ज़िंदा रखिए।
सच का साथ दीजिए।
क्योंकि अगर आज मीडिया चुप रही,
तो कल देश बोलेगा — और तब बहुत देर हो चुकी होगी।

देश दुनिया की खबरों की अपडेट के लिए AVN News पर बने रहिए।

By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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