दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक महसूस होने लगा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत गैस विदेशों से मंगाता है। इनमें से ज्यादातर सप्लाई पश्चिम एशिया के देशों से आती है।
ऐसे में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ा और समुद्री रास्तों पर संकट गहराया, तो देश में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे ज्यादा डर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सता रहा है, जिनकी रसोई पूरी तरह सिलेंडर पर निर्भर है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट से बढ़ी मुश्किल

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। यही वह रास्ता है जिससे भारत को बड़ी मात्रा में एलपीजी मिलती है।
भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है तो देश की कुल गैस खपत का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इस खबर ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है कि कहीं रसोई गैस की किल्लत न हो जाए।

33 करोड़ परिवारों की रसोई को प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
इसी कारण आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है ताकि पहले घरों तक गैस पहुंचे और उसके बाद अन्य क्षेत्रों को सप्लाई दी जाए। सरकार का कहना है कि किसी भी हालत में आम परिवारों की रसोई बुझने नहीं दी जाएगी।

पैनिक बुकिंग रोकने के लिए नए नियम

गैस की कमी की अफवाहों के बीच लोग जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक कराने लगे थे। इसे रोकने के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में अब दो सिलेंडर की बुकिंग के बीच 45 दिन का अंतर रखा गया है।
  • शहरों में यह अंतर 25 दिन कर दिया गया है।

पहले यह अंतर सिर्फ 21 दिन था। सरकार का कहना है कि इससे जमाखोरी और अनावश्यक बुकिंग रोकी जा सकेगी।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

संकट को देखते हुए देश की सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके बाद घरेलू उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अतिरिक्त उत्पादन को सीधे घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

होटल और रेस्टोरेंट को दिए गए वैकल्पिक ईंधन

घरेलू उपभोक्ताओं पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायिक क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक ईंधन की अनुमति दी है। पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि संकट के समय इन ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए:

  • बायोमास
  • RDF पेलेट्स
  • केरोसिन
  • कोयला

इससे एलपीजी की मांग कम होगी और घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी हो सकेंगी।

कॉमर्शियल गैस की सप्लाई में कटौती

सरकार ने व्यावसायिक गैस उपभोक्ताओं के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

  • कॉमर्शियल उपयोग के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत गैस आवंटन दिया जाएगा।
  • अस्पताल और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता सूची में रखा गया है।

इस व्यवस्था को लागू करने में राज्य सरकारों की भी भूमिका होगी।

राज्यों को अतिरिक्त केरोसिन और कोयला

संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं।

  • 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन जारी किया गया है।
  • छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले का अतिरिक्त आवंटन करने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता बनी रहेगी।

कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी

गैस की कमी के समय कालाबाजारी की संभावना बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए सरकार ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है।

  • IOCL, HPCL और BPCL के अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है।
  • जिला स्तर पर निगरानी समितियां गठित की जा रही हैं।
  • राज्यों को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस संकट को लेकर सरकार की ऊर्जा नीति पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध के दूरगामी परिणाम होंगे और कई रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत किन देशों से तेल खरीदेगा, यह बाहरी दबावों से प्रभावित हो रहा है।

पेट्रोलियम मंत्री का जवाब

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है।

उनके मुताबिक भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है और गैर-होर्मुज स्रोतों से आयात बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और एटीएफ की कोई कमी नहीं है।

सरकार ने जनता से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अतिरिक्त गैस बुकिंग न करें।

रसोई
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी

गरीब परिवारों की सबसे बड़ी चिंता

हालांकि सरकार लगातार भरोसा दिला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की चिंता कम नहीं हुई है। महंगाई के दौर में पहले से ही रसोई का खर्च बढ़ा हुआ है। ऐसे में अगर गैस की किल्लत होती है तो सबसे ज्यादा असर उन्हीं परिवारों पर पड़ेगा जिनकी आय सीमित है।
अब लोगों की नजर सरकार के अगले कदमों और वैश्विक हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि हर घर की रसोई की आग इसी पर निर्भर करती है।

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