बच्चियों को अब कम उम्र में पीरियड्स क्यों आने लगे हैं?- कारण, प्रभाव और जरूरी जानकारी ..
नीचे बच्चियों को कम उम्र में पीरियड्स क्यों आने लगे हैं इस विषय पर पूरा, विस्तार से और सरल भाषा में यह लेख है। यह लेख माता-पिता, शिक्षक और किशोरियों (बच्चियों)—सभी के लिए उपयोगी है।
बच्चियों को अब कम उम्र में पीरियड्स क्यों आने लगे हैं?
Periods at early age :आज के समय में यह देखा जा रहा है कि कई लड़कियों (बच्चियों) को 8–9 साल की उम्र में ही पीरियड्स आने लगे हैं, जबकि पहले यह उम्र 12–14 साल मानी जाती थी। यह बदलाव माता-पिता के लिए एक चिंता का विषय बन गया है। तो आइए जानते हैं इसके मुख्य कारण, इसके शरीर और मन पर प्रभाव, और क्या सावधानी जरूरी है।
पीरियड्स क्या हैं?
पीरियड्स या मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जो तब शुरू होती है जब लड़की का शरीर धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है और हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। यह संकेत होता है कि शरीर भविष्य में माँ बनने की क्षमता की ओर बढ़ रहा है।
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पहले और अब की उम्र में फर्क क्यों?
पहले:
- पीरियड्स की सामान्य उम्र: 12–14 साल
अब:
- कई लड़कियों को 8–10 साल में ही पीरियड्स आने लगे हैं
इसे मेडिकल भाषा में “Early Puberty” या “Precocious Puberty” कहा जाता है।
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कम उम्र में पीरियड्स आने के मुख्य कारण
- खान-पान में बदलाव
आज के बच्चों का भोजन पहले से बहुत बदल गया है:
- जंक फूड
- फास्ट फूड
- पैकेट वाला खाना
- ज्यादा मीठा और तला-भुना भोजन
इन चीजों में मौजूद केमिकल और हार्मोन शरीर के प्राकृतिक हार्मोन को जल्दी सक्रिय कर देते हैं।
- मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी
- कम खेलना
- ज्यादा मोबाइल और टीवी स्क्रीन टाइम
- शारीरिक मेहनत कम होना
मोटापा शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन बढ़ाता है, जिससे पीरियड्स जल्दी आ सकते हैं।
- हार्मोन वाले दूध और मांस उत्पाद
कुछ डेयरी और मांस उत्पादों में:
- कृत्रिम हार्मोन
- ग्रोथ इंजेक्शन
ये हार्मोन बच्चों के शरीर पर असर डालते हैं और यौवन जल्दी शुरू हो सकता है।
- पर्यावरण प्रदूषण और केमिकल
- प्लास्टिक बोतलें और टिपिन बॉक्स
- कॉस्मेटिक्स
- कीटनाशक
- केमिकल साबुन और शैंपू
इनमें मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टर शरीर के हार्मोन सिस्टम को बिगाड़ देते हैं।
- मानसिक तनाव और भावनात्मक दबाव
- पढ़ाई का दबाव
- पारिवारिक तनाव
- मोबाइल और सोशल मीडिया
तनाव से हार्मोन असंतुलन होता है, जो पीरियड्स जल्दी आने का कारण बन सकता है।
- अनुवांशिक (Genetic) कारण
अगर:
- माँ या दादी को पीरियड्स जल्दी आए थे
तो बच्ची को भी जल्दी आ सकते हैं।
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कम उम्र में पीरियड्स आने के प्रभाव
शारीरिक प्रभाव:
- कद का जल्दी रुक जाना
- थकान
- हार्मोन असंतुलन
मानसिक प्रभाव:
- डर और घबराहट
- शर्म महसूस करना
- भावनात्मक अस्थिरता

माता-पिता को क्या करना चाहिए?
- सही उम्र से पहले जानकारी दें
- 7–8 साल की उम्र से शरीर के बदलाव समझाएं
- डराएं नहीं, सही भाषा का इस्तेमाल करें
- संतुलित आहार दें
- हरी सब्जियाँ
- फल
- घर का बना खाना
- जंक फूड कम करें
- शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं
- रोज खेलकूद
- योग
- दौड़-भाग
- केमिकल से बचाव
- प्लास्टिक की जगह स्टील या कांच
- कम केमिकल वाले उत्पाद
- प्राकृतिक साबुन और तेल
- डॉक्टर से कब मिलें?
अगर:
- 8 साल से पहले पीरियड्स आ जाएं
- बहुत ज्यादा दर्द या खून आए
- बच्ची बहुत परेशान रहे
तो बाल रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।
क्या कम उम्र में पीरियड्स आना खतरनाक है?
- हर बार नहीं।
- कई मामलों में यह सामान्य विकास का हिस्सा भी हो सकता है।
लेकिन नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
आज की जीवनशैली, खान-पान और पर्यावरण की वजह से बच्चों में पीरियड्स की उम्र कम हो रही है। सही जानकारी, प्यार भरा संवाद और स्वस्थ जीवनशैली से इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
Note :-
सुझाव:- यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा अगर आप या आपका बच्चा किसी बीमारी से ग्रसित हैं या आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें.
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