एवीएन न्यूज डेस्क नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली सहित देशभर में डेंगू का कहर काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. दिल्ली की स्थिति भी ऐसी है कि यहां के प्राइवेट अस्पतालों में हर दूसरा और तीसरा मरीज डेंगू से जूझ रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक बीते 15 दिनों में डेंगू के मामले अचानक से काफी बढ़े हैं. इनमें से अधिकतर अधेड़ यानी बुजुर्ग उम्र के मरीज हैं.

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में डेंगू का खौफ बहुत बढ़ता जा रहा है. बच्चों में तेजी से घट रही है प्लेटलेट्स की समस्या बहुत बड़ी चिंता का कारण है. गाजियाबाद में डेंगू के एक्टिव मामलों की संख्या कुल 113 है.

गाजियाबाद के जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों में बच्चों की संख्या सबसे अधीक है. नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि यहां हर रोज डेंगू के आधा दर्जन मरीज रोजाना आ रहे हैं.गाजियाबाद जिला प्रशासन के मुताबिक, शनिवार को 69 मरीजों का चेकअप किया गया जिनमें से चार बच्चों समेत डेंगू के 12 नए मामले सामने आए हैं. गाजियाबाद में इस सीजन में डेंगू के कुल 924 मरीज का आंकड़ा दर्ज किया गया है.

पंजाब के मुक्तसर में डेंगू का खूब आंतक है

पंजाब के मुक्तसर में भी डेंगू का आतंक बढ़ता ज्यादा जा रहा है. यहां डेंगू के रोजाना यानी डेली 10 मामले सामने आ रहे हैं. डेंगू के कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 214 हो गई है. यहां पर 13 क्षेत्र ऐसे हैं जो डेंगू का गढ़ बन चुके हैं. इनमें दोदा, चक्क शेरेवाला, मुक्तसर शहर व मलोट के क्षेत्र शामिल हैं. यहां से डेली यानी रोजाना पांच से 10 लोग डेंगू से पाजिटव हो रहे हैं. हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से उक्त क्षेत्रों में अधिक फोकस किया जा रहा है.

हरियाणा के जींद में भी डेंगू की मार है

हरियाणा के जींद में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़कर 267 हो गई है. लगातार बढ़ रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सारी टीम को फील्ड में उतार दी है. मेडिकल टीमों द्वारा बीमार लोगों के खून के सैंपल लिए जा रहे हैं इनकी जांच करवाई जा रही है, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है उनके आसपास रहने वाले लोगों के खून के सैंपल यानी नमूने भी लिए जा रहे हैं.

डेंगू के मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट मोड में है डेंगू के मरीजों के लिए जींद के सिविल अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है जिसमें 12 बेड लगाए गए हैं और पर बेड पर मच्छरदानी भी लगाई गई है ताकि जो भी मरीज वहां आए उसको मच्छर न काट सके और उसका इलाज आसानी से किया जाए. जींद जिले में चिकनगुनिया के भी दो नए मामले सामने आए हैं जिले में चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या भी कुल पांच हो गई है.

कब और कैसे फैलता है डेंगू

डेंगू संक्रमण DEN-1, DEN-2, DEN-3, और DEN-4 वायरस यानी विषाणु (Virus) से फैलता है. इन चारों विषाणु को सीरोटाइप कहा जाता है क्योंकि ये चारों अलग-अलग तरीके से एंटीबॉडी को प्रभावित करते हैं. आप अलग-अलग स्ट्रेन से चार बार मे भी डेंगू से संक्रमित हो सकते हैं. डेंगू का मौसम मानसून के बाद शुरू होता है और सर्दियों की शुरुआत तक फैला रहता है.

डॉक्टर्स के अनुसार डेंगू (Dengue) के मामले दो स्थितियों में ज्यादा गंभीर (Complications in Dengue) हो जाते हैं. पहला ब्लड प्रेशर का अचानक कम हो जाना और दूसरा प्लेटलेट्स तेजी से डाउन यानी गिरना. इस स्थिति में ब्लीडिंग का खतरा भी बढ़ काफी बढ़ जाता है. कम गंभीर मामलों में मरीज को 5-6 दिन में अस्पताल से छुट्टी आसानी से मिल जाती है.

ऐसे कर सकते है बचाव

डेंगू मच्छरों से फैलने वाली एक बीमारी है और इससे बचाव (Dengue Precautions) करना बहुत ही जरूरी है. डेंगू का मच्छर अक्सर दिन के समय में काटता है. इसलिए दिन में मच्छरों के काटने से खुद को बचाएं रखे . इन दिनों फुल बाजू के कपड़े और पावों यानी पैरो में जूते पहन कर रहें. शरीर को कहीं से भी खुला बिल्कुल ना छोड़ें. घर के आसपास या घर के अंदर पानी नहीं इकट्ठा यानी जमने ना दें. कूलर, गमले, टायर में जमे पानी को साफ और बहा दें. कूलर में अगर पानी है तो इसे भी समय समय पर खाली कर लें वरना इसमें मच्छर पनप सकते हैं. रात में सोते समय मच्छरदानी लगाना बचाव का सबसे सही और सुरक्षित तरीका है.

By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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