शारदीय नवरात्रि की मुख्य आरती: जानिए मां दुर्गा की आरती का महत्व, विधि और सही विधि…
शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम मां दुर्गा की पूजा के बाद आरती करने की परंपरा है। माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भक्तों को मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नवरात्रि में आरती केवल पूजा का एक हिस्सा नहीं, बल्कि मां के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी है। मंदिरों और घरों में शाम के समय विशेष रूप से मां दुर्गा की आरती की जाती है।
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शारदीय नवरात्रि में कौन सी आरती मुख्य है?
मां दुर्गा की पूजा में सबसे लोकप्रिय आरतियों में “जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी” प्रमुख है। नवरात्रि के दौरान अधिकांश घरों और मंदिरों में इस आरती का गायन किया जाता है।

मां दुर्गा की प्रसिद्ध आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दो नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती॥
शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे॥
ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
चौंसठ योगिनी मंगल, गावत नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति करता॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
नोट: आरती के अलग-अलग क्षेत्रों और पुस्तकों में कुछ पंक्तियों के शब्दों में थोड़ा अंतर मिल सकता है।
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आरती का धार्मिक महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में दीपक को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। जब भक्त मां दुर्गा के सामने दीपक जलाकर आरती करते हैं, तो इसका भाव यह होता है कि मां हमारे जीवन से अज्ञान, नकारात्मकता और भय का अंधकार दूर करें।
नवरात्रि के दौरान आरती करने से भक्त का मन पूजा में एकाग्र होता है। सामूहिक रूप से आरती करने से परिवार और समाज में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बनता है।
नवरात्रि में आरती कैसे करें?
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को स्वच्छ करें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद धूप, अगरबत्ती और पुष्प अर्पित करें।
इसके बाद मां को भोग लगाकर श्रद्धा के साथ आरती शुरू करें।
आरती की सामान्य विधि
1. सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें।
2. मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
3. मां को फूल, अक्षत, रोली, सिंदूर और चुनरी अर्पित करें।
4. घी या तेल का दीपक जलाएं।
5. धूप और अगरबत्ती अर्पित करें।
6. मां को फल या सात्विक भोग लगाएं।
7. “जय अम्बे गौरी” आरती का पाठ करें।
8. आरती के दौरान दीपक को मां की प्रतिमा के सामने श्रद्धापूर्वक घुमाएं।
9. आरती के बाद मां से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
10. अंत में सभी लोगों को आरती दिखाकर प्रसाद वितरित करें।
आरती के समय किन बातों का ध्यान रखें?
आरती करते समय मन को शांत और एकाग्र रखने की कोशिश करनी चाहिए। पूजा में दिखावे की बजाय श्रद्धा और भावना को अधिक महत्व दिया जाता है।
आरती के दौरान दीपक को सावधानी से पकड़ना चाहिए। छोटे बच्चों को जलते हुए दीपक से दूर रखना चाहिए। पूजा के बाद दीपक और धूप को सुरक्षित स्थान पर रखना भी जरूरी है।
नवरात्रि में सुबह और शाम आरती
नवरात्रि के दौरान कई परिवारों में सुबह पूजा के बाद और शाम को सूर्यास्त के आसपास आरती करने की परंपरा है। हालांकि आरती का समय स्थानीय पूजा-पद्धति और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
विशेष रूप से अष्टमी और नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों मंदिरों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और सामूहिक आरती में भाग लेते हैं।
आरती के बाद क्या करें?
आरती समाप्त होने के बाद मां दुर्गा को प्रणाम करके अपनी मनोकामना और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। इसके बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटा जाता है।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं। कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेते हैं।
मां दुर्गा की आरती का आध्यात्मिक संदेश
मां दुर्गा शक्ति, साहस और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती हैं। नवरात्रि में आरती के माध्यम से भक्त मां से अपने जीवन में शक्ति, धैर्य, विवेक और सकारात्मकता प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
आरती की लौ हमें यह संदेश भी देती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों, विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ उनका सामना किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
शारदीय नवरात्रि की आरती मां दुर्गा की उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। “जय अम्बे गौरी” जैसी प्रसिद्ध आरती के माध्यम से भक्त मां के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में पूरे परिवार के साथ श्रद्धापूर्वक आरती करने से घर में धार्मिक वातावरण बनता है और मन को शांति मिलती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन और श्रद्धा से मां दुर्गा की आराधना करने वाले भक्तों पर मां की कृपा बनी रहती है। नवरात्रि का वास्तविक संदेश भी
यही है कि हम अपने भीतर की नकारात्मकता पर विजय प्राप्त कर सत्य, धर्म और सकारात्मकता के मार्ग पर आगे बढ़ें।
Note:
Disclaimer: शारदीय नवरात्रि की मुख्य आरती: जानिए मां दुर्गा की आरती का महत्व, विधि और सही विधि.. सोर्स पर आधारित है, प्रकाशक किसी भी त्रुटि या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
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