महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और आत्मिक शांति का संगम है। यह वही पावन रात्रि है जब भक्त पूरी रात जागकर भगवान शिव का स्मरण करते हैं, जलाभिषेक करते हैं और अपने दुख-दर्द भोलेनाथ के चरणों में रख देते हैं।

इस वर्ष महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार तिथि और योग दोनों ही बेहद शुभ बन रहे हैं, जिससे इस शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है।

इस बार कब है महाशिवरात्रि? जानिए तिथि और पुण्यकाल

पंडितों के अनुसार 15 फरवरी को दिन में त्रयोदशी तिथि रहेगी, लेकिन शाम 5:04 बजे से चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी, जो पूरी रात रहेगी। यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को ही मनाया जाएगा।

चतुर्दशी तिथि: 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 तक
विशेष पुण्यकाल की शुरुआत: 15 फरवरी शाम 5:04 से
सूर्योदय: सुबह 6:25 बजे
निशीथ काल (शिव पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय): रात 11:52 से 12:42 तक
मान्यता है कि निशीथ काल में की गई पूजा सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है।

इस वर्ष बन रहे हैं दुर्लभ योग

इस बार महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, वरियान और अमृत सिद्धि जैसे महायोग बन रहे हैं। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी सुबह 6:25 से शाम 7:26 तक रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन योगों में किया गया जप-तप, पूजा और दान कई गुना फल देता है। साधना करने वालों के लिए यह रात बेहद खास मानी जा रही है।

महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व

पुराणों के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी रात भगवान शंकर का रुद्र रूप में अवतरण हुआ था। यही वह रात्रि है जब शिव तांडव करते हैं और सृष्टि के संतुलन का कार्य होता है।
इसी दिन को शिव-पार्वती विवाह के रूप में भी मनाया जाता है। यही कारण है कि इसे “सिद्ध रात्रि” कहा गया है — ऐसी रात जब सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी हो सकती है।

चार प्रहर में ऐसे करें शिव पूजा

पहला प्रहर
शाम 6:11 से रात 9:38 तक
दूसरा प्रहर
रात 9:38 से 1:04 (16 फरवरी)
तीसरा प्रहर
रात 1:04 से सुबह 4:31
चौथा प्रहर
सुबह 4:31 से 7:57

निशिता काल पूजा: 12:37 AM से 01:32 AM (16 फरवरी)

शिवरात्रि पारण: 16 फरवरी सुबह 7:57 से दोपहर 1:04 तक

घर में कैसे करें महाशिवरात्रि की सरल पूजा

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान साफ कर शिवलिंग रखें।
सबसे पहले जल से अभिषेक करें, फिर दूध, दही, घी और शहद से। मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें।

इसके बाद:

बेलपत्र जरूर चढ़ाएं
सफेद फूल, आक और धतूरा अर्पित करें
धूप-दीप जलाएं
कुछ देर आंख बंद कर शिव जी का ध्यान करें
अगर रात भर जागना संभव न हो, तो भी सच्चे मन से की गई थोड़ी सी पूजा भोलेनाथ स्वीकार कर लेते हैं।

मंदिर में पूजा करने वाले भक्त क्या करें

स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और मंदिर जाएं। शिवलिंग पर जल अर्पित करें, पुजारी के बताए नियमों का पालन करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें।
संभव हो तो रात्रि में विशेष रुद्राभिषेक में शामिल हों — मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात की पूजा जीवन की कई बाधाएं दूर कर देती है।

महाशिवरात्रि
मंदिर में पूजा करने वाले भक्त क्या करें

महाशिवरात्रि पर जरूर करें इन मंत्रों का जप

सबसे सरल मंत्र —
“ॐ नमः शिवाय”
महामृत्युंजय मंत्र —
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं, क्या नहीं
चढ़ाएं

जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, सफेद फूल, आक, धतूरा

न चढ़ाएं

केतकी का फूल, तुलसी, लाल तेज खुशबू वाले फूल, मुरझाए या बासी फूल

अंत में…

महाशिवरात्रि हमें सिखाती है कि जीवन चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, भोलेनाथ का नाम लेने से मन हल्का हो जाता है। यह पर्व बाहरी दिखावे का नहीं, भीतर की शुद्ध भावना का है।

इस पावन रात बस इतना करें —
थोड़ा जल, दो बेलपत्र और दिल भर की श्रद्धा लेकर शिव जी के सामने बैठ जाएं…
भोलेनाथ सब सुन लेते हैं।

हर हर महादेव

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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