बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियों के उफान ने राज्य के बड़े हिस्से में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब 14 जिलों के 84 प्रखंडों की 517 ग्राम पंचायतों में करीब 41.45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश ने संकट को और बढ़ा दिया है।

सबसे चिंताजनक तस्वीर भागलपुर से सामने आ रही है, जहां गंगा का पानी तटीय इलाकों से आगे बढ़कर शहर और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) परिसर तक पहुंच गया है। कई जगहों पर छात्र, शिक्षक और कर्मचारी नाव के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं।

41.45 लाख लोग बाढ़ की चपेट में

आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार बिहार के पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल जिले बाढ़ से प्रभावित हैं।

इन जिलों में 84 प्रखंडों की 517 पंचायतों में लगभग 41.45 लाख लोगों पर बाढ़ का सीधा असर पड़ा है। लगातार बारिश के कारण नदियों और छोटी धाराओं में पानी बढ़ा, जबकि नेपाल के कैचमेंट क्षेत्रों में हुई बारिश ने भी बिहार की नदियों का दबाव बढ़ाया।

भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप, TMBU परिसर में नाव

भागलपुर में बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर के बड़े हिस्से में पानी भर गया है।

प्रशासनिक भवन, सीनेट हॉल, महिला छात्रावास, कैंटीन और प्रोफेसर्स कॉलोनी समेत परिसर के कई हिस्से जलमग्न बताए जा रहे हैं। जरूरी काम से विश्वविद्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। कई जगहों पर नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

यह तस्वीर सिर्फ जलभराव की नहीं, बल्कि बिहार में बाढ़ प्रबंधन की पुरानी चुनौती की भी कहानी कहती है। स्थानीय छात्रों का कहना है कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर विश्वविद्यालय परिसर में ऐसी स्थिति पैदा होती है।

बाढ़
लोग जेसीबी से रास्ता पार करते हुए

सुल्तानगंज में गंगा ने तोड़ा पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर

भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 9 सितंबर की सुबह 36.78 मीटर दर्ज किया गया। यह अगस्त 2021 में दर्ज 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर था।

हालांकि अधिकारियों के मुताबिक वहां जलस्तर का रुझान फिलहाल स्थिर रहा, लेकिन पहले से डूबे इलाकों में पानी कम नहीं होने के कारण लोगों की परेशानी बनी हुई है।

पटना-मुंगेर में राहत के संकेत, लेकिन खतरा टला नहीं

गंगा के कुछ हिस्सों में जलस्तर में गिरावट या स्थिरता के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिहार से बाढ़ का खतरा खत्म हो गया है।

भागलपुर समेत कई इलाकों में पहले से जमा पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। भागलपुर शहर के भी कई तटीय वार्ड बाढ़ की चपेट में हैं।

वहीं, बिहार में कई प्रमुख नदियां अलग-अलग स्थानों पर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा शामिल हैं।

बाढ़
राज्य की राजधानी पटना में बाढ़ का पानी

10 सितंबर को भी मौसम से राहत नहीं

बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने बिहार में बारिश, मेघ गर्जन और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। IMD के पटना केंद्र के अनुसार 10 सितंबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की संभावना है। अगले कुछ दिनों तक भी गरज-चमक का खतरा बना हुआ है।

आज बिहार के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी है और कुछ क्षेत्रों में तेज हवा के साथ आंधी-वज्रपात की आशंका जताई गई है। ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

अररिया में वज्रपात ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ली

बाढ़ और बारिश के बीच अररिया से दर्दनाक खबर सामने आई है। ताराबाड़ी थाना क्षेत्र के तरौना भोजपुर गांव में बुधवार शाम वज्रपात की चपेट में आने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक तीनों लोग मवेशी लाने के लिए घर से निकले थे। बकरा और रतवा नदी के बीच अचानक बिजली गिरने से तीनों उसकी चपेट में आ गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि बारिश के दौरान खुले मैदान, पेड़, नदी या जलभराव वाले इलाकों में जाना जानलेवा साबित हो सकता है।

 

करीब 2 हजार नावें राहत और आवाजाही में जुटीं

बाढ़ प्रभावित लोगों को निकालने और जरूरी आवाजाही के लिए प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 9 सितंबर के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1,979 नावें संचालित की जा रही थीं।

इसके अलावा 723 सामुदायिक रसोई चल रही थीं, जबकि 15 राहत शिविरों में हजारों विस्थापित लोगों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।

राहत सामग्री के तौर पर करीब 1.94 लाख पॉलीथिन शीट और 29,400 सूखा राशन पैकेट वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है। पशुओं के लिए भी चारा उपलब्ध कराया जा रहा है।

सड़क, रेल और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर

बाढ़ का असर सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण सड़कें पानी में डूब गई हैं और कुछ मार्गों पर आवागमन बाधित हुआ है। भागलपुर-मुंगेर के बीच NH-80 पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।

पटना-गया रेलखंड पर भी सुरक्षा कारणों से ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ने की रिपोर्ट सामने आई है। इससे बाढ़ का असर अब सड़क और रेल यातायात तक साफ दिखाई दे रहा है।

बाढ़ का पानी घटेगा तो बढ़ेगी दूसरी चुनौती

बाढ़ का पानी उतरना राहत की खबर जरूर होगी, लेकिन इसके साथ नई स्वास्थ्य चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

जमा पानी, गंदगी, सड़ता कचरा और दूषित पेयजल के कारण डायरिया, त्वचा संबंधी संक्रमण, मलेरिया, डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए प्रभावित इलाकों में साफ पेयजल, क्लोरीनेशन, दवाओं और मेडिकल टीमों की उपलब्धता बेहद जरूरी है।

बाढ़ प्रभावित लोगों कोभीसलाह दी जा रही है कि वे संदिग्ध या दूषित पानी का इस्तेमाल न करें और बाढ़ के पानी से मिली मछलियों अथवा खाद्य पदार्थों को बिना जांच के न खाएं।

सरकार और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

बिहार में बाढ़ की यह स्थिति प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर रही है। एक तरफ लाखों लोगों तक भोजन, पानी, दवा और पशु चारा पहुंचाना है, तो दूसरी तरफ लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर पर नजर रखनी है।

पहले से प्रभावित क्षेत्रों में यदि दोबारा तेज बारिश होती है तो निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन, NDRF और SDRF की टीमों के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

बिहार बाढ़: अभी खतरा पूरी तरह टला नहीं

बिहार में कुछ स्थानों पर नदियों के जलस्तर में स्थिरता या गिरावट के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन 41.45 लाख लोगों का प्रभावित होना बताता है कि संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।

भागलपुर में विश्वविद्यालय परिसर तक पहुंचा पानी, अररिया में वज्रपात से तीन मौतें, जलमग्न सड़कें और गांवों में नाव से आवागमन – ये तस्वीरें बता रही हैं कि बिहार के सामने इस समय सिर्फ बाढ़ नहीं, बल्कि बारिश, जलभराव, स्वास्थ्य और आवागमन का संयुक्त संकट है।

अगले 24 से 48 घंटे प्रशासन और बाढ़ प्रभावित परिवारों दोनों के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

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Written & Edit by : Chandan Patel

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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