जमुई। सरकारी सिस्टम की लापरवाही की इससे बड़ी तस्वीर क्या होगी कि जिस शिक्षक की 4 नवंबर 2024 को मृत्यु हो चुकी थी, उसी शिक्षक को वर्ष 2026 में प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहने के आरोप में स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया। मामला जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित +2 आरएसएस उच्च विद्यालय बाराबांध से जुड़ा है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा, जमुई की ओर से 3 अगस्त 2026 को जारी स्पष्टीकरण पत्र में मृत शिक्षक विजय कुमार झा का नाम शामिल होना शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड, मॉनिटरिंग और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह सिर्फ एक कागजी गलती नहीं है। सवाल यह है कि अगर शिक्षक की मृत्यु की जानकारी विभाग को पहले ही लिखित रूप से दी जा चुकी थी, तो करीब दो साल बाद उनका नाम प्रशिक्षण सूची तक कैसे पहुंचा और फिर उसी आधार पर उनके नाम से स्पष्टीकरण कैसे जारी हो गया?
मृत शिक्षक को बताया गया प्रशिक्षण से अनुपस्थित
मिली जानकारी के अनुसार राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, बिहार, पटना में 20 से 24 जुलाई 2026 तक सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) के शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों से विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा। इसी सूची में खैरा प्रखंड के +2 आरएसएस उच्च विद्यालय बाराबांध के शिक्षक विजय कुमार झा का नाम भी दर्ज था।
विभागीय पत्र में प्रशिक्षण से अनुपस्थिति को लापरवाही, उदासीनता, स्वेच्छाचारिता और वरीय पदाधिकारी के आदेश की अवहेलना माना गया तथा 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस शिक्षक की मृत्यु नवंबर 2024 में हो चुकी थी, वह जुलाई 2026 के प्रशिक्षण में शामिल कैसे होते?
चार शिक्षकों से मांगा गया था स्पष्टीकरण
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नितेश कुमार की ओर से जारी पत्र में कुल चार शिक्षक-शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा गया।
इनमें:
+2 जनता उच्च विद्यालय सतायन की शिक्षिका नेहा कुमारी गुप्ता और शिक्षक राजीव कुमार
+2 आरएसएस उच्च विद्यालय बाराबांध, खैरा के शिक्षक विजय कुमार झा
+2 एसएस उच्च विद्यालय सोनो की शिक्षिका अंजली कुमारी शामिल हैं।
इन सभी पर प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया। हालांकि विजय कुमार झा के मामले ने पूरे पत्र की प्रक्रिया और विभागीय रिकॉर्ड की जांच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

4 नवंबर 2024 को हो चुकी थी विजय कुमार झा की मौत
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शिक्षक विजय कुमार झा की 4 नवंबर 2024 को बीमारी के कारण मृत्यु हो चुकी थी।
यानी जिस समय वर्ष 2026 का प्रशिक्षण आयोजित किया गया, उस समय विजय कुमार झा इस दुनिया में ही नहीं थे। इसके बावजूद उनका नाम प्रशिक्षण से अनुपस्थित शिक्षकों की सूची में शामिल होना अपने आप में बेहद गंभीर प्रशासनिक चूक नजर आती है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि विभाग के पास शिक्षकों का सेवा रिकॉर्ड किस रूप में मौजूद है और उसे अपडेट करने की जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी या कार्यालय की है?
विद्यालय ने विभाग को पहले ही दी थी मृत्यु की जानकारी
+2 आरएसएस उच्च विद्यालय खैरा प्रखंड बाराबांध के प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिमेष कुमार ने बताया कि शिक्षक विजय कुमार झा की बीमारी के कारण वर्ष 2024 में ही मृत्यु हो गयी थी।
प्रधानाध्यापक के अनुसार उनकी मृत्यु की लिखित सूचना विद्यालय की ओर से शिक्षा कार्यालय को दी जा चुकी थी।
अगर विद्यालय स्तर से विभाग को मृत्यु की जानकारी उपलब्ध करा दी गयी थी, तो फिर विभागीय रिकॉर्ड में शिक्षक का नाम सक्रिय कैसे रहा? यही सवाल अब पूरे मामले का सबसे अहम बिंदु बन गया है।
सिस्टम की लापरवाही या रिकॉर्ड अपडेट में बड़ी चूक?
यह घटना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
पहला सवाल: जब शिक्षक की मृत्यु की सूचना विभाग को दी जा चुकी थी, तो उनका रिकॉर्ड अपडेट क्यों नहीं हुआ?
दूसरा सवाल: वर्ष 2026 में प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की सूची तैयार करते समय सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
तीसरा सवाल: प्रशिक्षण से अनुपस्थित शिक्षकों को स्पष्टीकरण जारी करने से पहले संबंधित शिक्षकों की स्थिति की पुष्टि क्यों नहीं की गयी?
चौथा सवाल: मृत शिक्षक का नाम सरकारी प्रशिक्षण सूची में शामिल करने की गलती किस स्तर पर हुई?
ये सवाल महज एक शिक्षक के नाम तक सीमित नहीं हैं। यह सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक निगरानी की उस व्यवस्था पर सवाल है, जिस पर हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं निर्भर करती हैं।
कागजों पर चल रहा है सिस्टम?
सरकारी विभागों में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी कर्मचारी की नियुक्ति, सेवा अवधि, स्थानांतरण, प्रशिक्षण, वेतन और सेवानिवृत्ति जैसे मामलों में रिकॉर्ड की भूमिका अहम होती है।
ऐसे में किसी मृत शिक्षक का नाम दो साल बाद प्रशिक्षण सूची में आना और फिर उसी नाम पर कारण बताओ नोटिस जारी होना यह सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं व्यवस्था वास्तविक स्थिति की बजाय सिर्फ कागजी आंकड़ों पर तो नहीं चल रही?
अगर एक मृत शिक्षक का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं हो सकता, तो आम शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की निगरानी कितनी गंभीरता से की जा रही है—यह बड़ा सवाल है।
अब जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
मामला सामने आने के बाद सिर्फ स्पष्टीकरण पत्र जारी करने तक बात खत्म नहीं होनी चाहिए। यह पता लगाना जरूरी है कि प्रशिक्षण सूची तैयार करने की प्रक्रिया क्या थी और विजय कुमार झा का नाम उसमें किस रिकॉर्ड के आधार पर शामिल किया गया।
साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि विद्यालय द्वारा दी गयी मृत्यु की लिखित सूचना विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज हुई थी या नहीं।
यदि सूचना मिलने के बावजूद रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। और अगर सूचना विभाग तक पहुंची ही नहीं थी, तो संबंधित दस्तावेजों की भी जांच होनी चाहिए।
डीईओ बोले : जांच के बाद स्पष्ट होगा मामला
इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने कहा कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट रूप से बतायी जा सकती है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले की जांच कितनी गंभीरतासे करताहैऔर क्या मृत शिक्षक के नाम पर जारी स्पष्टीकरण की गलती के लिए जिम्मेदारी तय होती है।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर जवाब देगा कौन?
एक मृत शिक्षक से वर्ष 2026 में प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहने का जवाब मांगना सिर्फ एक प्रशासनिक विसंगति नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।
जिस व्यक्ति की दो साल पहले मृत्यु हो चुकी है, उसे सरकारी कागजों में आज भी ड्यूटी पर मौजूद दिखाया जा रहा है—तो सवाल सिर्फ विजय कुमार झा के नाम का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जो रिकॉर्ड संभालती है।
अब जरूरत है कि विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करे, रिकॉर्ड दुरुस्त करे और यह स्पष्ट करे कि इतनी बड़ी चूक आखिर हुई कैसे।
क्योंकि सरकारी कागजों में गलती सिर्फ एक नाम की नहीं होती, उसके पीछे किसी न किसी स्तर पर जिम्मेदारी भी तय होती है।
Written & Edit by : Chandan Patel

