जमुई: बिहार के जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित +2 उच्च विद्यालय गरही में हिजाब को लेकर एक विवाद सामने आया है। विद्यालय की छात्राओं ने प्रधानाध्यापिका पर चेहरे से हिजाब हटाने के लिए दबाव बनाने, पढ़ाई से रोकने, मारपीट करने और फीस वसूली में अनियमितता जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर छात्राओं और उनके अभिभावकों ने विद्यालय परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हालांकि, जिला प्रशासन ने देर रात जारी प्रेस विज्ञप्ति में हिजाब हटाने के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के तहत डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार, चेहरे की स्पष्ट पहचान के लिए कुछ समय के लिए चेहरा खुला रखना आवश्यक था और इसे गलत तरीके से धार्मिक मुद्दे का रूप दे दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, +2 उच्च विद्यालय गरही की कई छात्राओं ने आरोप लगाया कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नंदनी उन्हें हिजाब पहनकर विद्यालय आने से मना करती हैं और चेहरे से हिजाब हटाने का दबाव बनाती हैं। छात्राओं का कहना है कि यदि वे हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचती हैं तो उन्हें कक्षा में पढ़ने से रोक दिया जाता है।
इस आरोप के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।
छात्राओं ने लगाए मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप
छात्राओं का आरोप है कि प्रधानाध्यापिका का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है। एक छात्रा ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने स्वयं पैसे खर्च कर स्कूल ड्रेस खरीदी, लेकिन किसी दिन ड्रेस नहीं पहनने पर डांट-फटकार के साथ मारपीट भी की गई।
छात्राओं का यह भी कहना है कि विद्यालय में अनुशासन के नाम पर कई बार अपमानजनक व्यवहार किया जाता है।
फीस और आईडी कार्ड को लेकर भी उठे सवाल
11वीं और 12वीं कक्षा की छात्राओं ने विद्यालय में फीस वसूली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नामांकन और अन्य मदों में 1,200 रुपये लिए जाते हैं, जबकि रसीद केवल 800 रुपये की ही दी जाती है।
इसके अलावा छात्राओं ने आरोप लगाया कि 20 रुपये का बनने वाला आईडी कार्ड 80 रुपये लेकर दिया जाता है। छात्राओं के अनुसार विद्यालय में 11वीं और 12वीं कक्षा में लगभग 30 छात्राएं अध्ययनरत हैं।

जिला प्रशासन ने क्या कहा?
जिला प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि विद्यालयों में अब डिजिटल उपस्थिति के लिए Face Recognition System (FRS) लागू किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत छात्रों की टैबलेट से फोटो ली जा रही थी। चेहरे की सही पहचान के लिए कुछ समय के लिए मास्क या हिजाब हटाने का अनुरोध किया गया था।
प्रशासन ने कहा कि इस तकनीकी प्रक्रिया का किसी भी छात्र या समुदाय की धार्मिक भावनाओं से कोई संबंध नहीं है और इसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर अफवाह फैलाई गई।
जिला शिक्षा पदाधिकारी का बयान
जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने बताया कि FRS प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट फोटो लेना अनिवार्य होता है। इसलिए शिक्षकों द्वारा छात्रों से कुछ समय के लिए मास्क या हिजाब हटाने को कहा जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि फीस वसूली और अन्य आरोपों की शिकायत मिली है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो, छात्राओं के आरोप और विद्यालय प्रशासन का पक्ष -सभी की निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निगाहें अब शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल यह मामला दो अलग-अलग दावों के बीच जांच के दौर में है। एक ओर छात्राएं हिजाब, मारपीट और फीस वसूली को लेकर गंभीर आरोप लगा रही हैं, वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि हिजाब हटाने की बात केवल फेस रिकग्निशन सिस्टम के तहत फोटो लेने की तकनीकी आवश्यकता थी। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिसके बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
Written & Edit by : Chandan Patel.
Ground Reportd By: Vikki Kumar

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