भोपाल/नर्मदापुरम: एक किसान पूरे साल खेत में दिन-रात मेहनत करता है। कभी सूखा, कभी बारिश तो कभी बढ़ती लागत उसकी कमर तोड़ देती है। लेकिन जब फसल बेचने की बारी आती है तो उसे अपनी मेहनत का पूरा दाम भी नहीं मिल पाता। यही दर्द अब आंदोलन का रूप ले चुका है। मध्य प्रदेश में मूंग की 100 फीसदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की मांग को लेकर हजारों किसान राजधानी भोपाल पहुंच चुके हैं। किसानों का साफ कहना है कि अगर सरकार उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य नहीं दे सकती, तो फिर किसानों की मेहनत और सरकारी वादों का क्या मतलब रह जाता है?
राजधानी के सावरकर सेतु के पास डेरा डाले किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे भोपाल छोड़कर नहीं जाएंगे। यदि जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री आवास तक मार्च भी किया जाएगा।
नर्मदापुरम से भोपाल तक किसानों का लंबा मार्च
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले करीब 2,000 किसान नर्मदापुरम से भोपाल तक मार्च करते हुए राजधानी पहुंचे। किसान अपने साथ अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और कई दिनों का राशन लेकर आए हैं, जिससे साफ है कि उन्होंने लंबी लड़ाई की तैयारी कर ली है।
मार्च के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे और भोपाल की सीमा तक पहुंच गए।
सरकार ने केंद्र से मांगी मदद, शिवराज सिंह चौहान को भेजा पत्र
आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है।
पत्र में बताया गया है कि 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच राज्य में लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ, जबकि अब तक केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसान MSP का लाभ लेने से वंचित रह सकते हैं।

8 लाख मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य की मांग
राज्य सरकार का कहना है कि इस वर्ष मूंग की औसत उत्पादकता अपेक्षा से अधिक रही है। इसलिए केंद्र सरकार खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 8 लाख मीट्रिक टन करे ताकि अधिक से अधिक किसानों को MSP का पूरा लाभ मिल सके।
सरकार के अनुसार अब तक 4.19 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो चुकी है और मौजूदा लक्ष्य जल्द पूरा होने की संभावना है।
देश के 40 प्रतिशत मूंग उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी
कृषि मंत्री ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि देश के कुल मूंग उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ऐसे में किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को विशेष निर्णय लेने की आवश्यकता है।
किसानों से मिले कृषि मंत्री, दिया भरोसा
मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।
बैठक में उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि मूंग खरीद समेत सभी मुद्दों पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश और ठोस कार्रवाई चाहिए।
किसानों की प्रमुख मांगें
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं :
- मूंग की 100 फीसदी MSP पर खरीद।
- ई-टोकन व्यवस्था की तकनीकी समस्याओं का समाधान।
- समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना।
- किसानों को खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
- सभी पात्र किसानों की फसल की सरकारी खरीद सुनिश्चित करना।
मोहन यादव सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती
भोपाल पहुंचा यह किसान आंदोलन राज्य सरकार के लिए इस वर्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में गिना जा रहा है।
यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती है तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है, जिसका असर प्रदेश की राजनीति और कृषि नीति दोनों पर पड़ सकता है।
क्या किसानों की मांग पूरी होगी?
अब निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं। यदि खरीद लक्ष्य बढ़ाया जाता है तो लाखों किसानों को राहत मिल सकती है। लेकिन यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो भोपाल में शुरू हुआ यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
किसानों का कहना है कि वे सम्मानजनक मूल्य मिलने तक पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मध्य प्रदेश में मूंग खरीद का मुद्दा किसानों के भरोसे और उनकी आजीविका से जुड़ा
मध्य प्रदेश में मूंग खरीद का मुद्दा अब केवल कृषि का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों के भरोसे और उनकी आजीविका से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। सरकार के सामने चुनौती है कि वह किसानों की मेहनत का उचित मूल्य सुनिश्चित करे और ऐसा समाधान निकाले जिससे आंदोलन समाप्त होने के साथ-साथ भविष्य में भी ऐसी स्थिति पैदा न हो।
Written & Edit by : Chandan Patel.

