गिद्धौर के गांवों में गहराया पेयजल संकट
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना का सपना गिद्धौर प्रखंड के कई गांवों में अधूरा नजर आ रहा है। भीषण गर्मी के बीच लोगों को पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ रहा है। कहीं पानी की टंकी टूट चुकी है, कहीं मोटर महीनों से खराब पड़ी है, तो कई जगहों पर केवल पाइप बिछाकर योजना को कागजों में पूरा दिखा दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना से हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया था, वह आज अधिकांश जगहों पर शोपीस बनकर रह गई है।
पानी के लिए रोजाना संघर्ष कर रहे सभी ग्रामीण
गिद्धौर प्रखंड के कई गांवों में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सुबह-शाम पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। हैंडपंपों पर भीड़ लगी रहती है और कई हैंडपंप भी खराब पड़े हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि कई बार घंटों इंतजार के बाद भी पीने योग्य पानी नहीं मिल पाता। इससे लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
कहीं टंकी टूटी, कहीं मोटर खराब
नल-जल योजना की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। कई गांवों में पानी की टंकियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। कई स्थानों पर मोटर खराब होने के कारण महीनों से जलापूर्ति बंद है।
कुछ पंचायतों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई लेकिन आज तक घरों तक पानी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।
जहां पानी आ रहा है, वह भी पीने योग्य नहीं
सबसे गंभीर बात यह है कि जिन गांवों में नल-जल योजना के तहत पानी की आपूर्ति हो रही है, वहां भी पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर पानी में बदबू आती है, रंग पीला दिखाई देता है और उसमें अशुद्धियां नजर आती हैं। ऐसे पानी को पीने से लोगों में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी बने दर्शक?
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी स्थिति से पूरी तरह अवगत हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब मूलभूत जरूरतों की बात आती है तो जिम्मेदार लोग चुप्पी साध लेते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को पानी भरने में समय लगाना पड़ता है, जबकि बुजुर्गों को भी पानी के लिए काफी परेशान होना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आखिर कब मिलेगा गिद्धौर को शुद्ध पेयजल?
नल-जल योजना का उद्देश्य लोगों को घर बैठे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन गिद्धौर के कई गांवों में यह सपना आज भी अधूरा है। ग्रामीण अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक उन्हें पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?
जरूरत है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल कागजी समीक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और खराब पड़ी योजनाओं को तत्काल चालू करवाएं। क्योंकि पानी केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

अब जरूरत है जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के जवाबदेह बनने की
गिद्धौर प्रखंड में पेयजल संकट केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते नल-जल योजना की खामियों को दूर नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। अब जरूरत है जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के जवाबदेह बनने की, ताकि हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाने का सपना वास्तव में साकार हो सके।
Written by : Chandan Patel.
