Jamui Sadar Hospital Crisis: मरीजों की सांसें सिलेंडर के भरोसे: बिहार के जमुई जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल में ऑक्सीजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अस्पताल परिसर में लगाए गए दोनों ऑक्सीजन प्लांट पिछले करीब एक सप्ताह से खराब पड़े हैं। इसके कारण इमरजेंसी समेत कई वार्डों में मरीजों को सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन दी जा रही है। गंभीर मरीजों के इलाज में हो रही परेशानी ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोरोना काल में लगाए गए थे करोड़ों के ऑक्सीजन प्लांट
कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की पहल पर जमुई सदर अस्पताल में 500 एलपीएम और 950 एलपीएम क्षमता वाले दो आधुनिक ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इन प्लांटों के जरिए अस्पताल के विभिन्न वार्डों तक पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था की गई थी।
इन प्लांटों का मुख्य उद्देश्य था कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को बिना किसी रुकावट के तत्काल ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन अब रखरखाव में लापरवाही और तकनीकी खराबी के कारण दोनों प्लांट पूरी तरह बंद पड़े हैं।
इमरजेंसी वार्ड में सिलेंडर के सहारे इलाज
स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों और सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को फिलहाल ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे इलाज दिया जा रहा है। अस्पताल कर्मियों को हर दो घंटे पर सिलेंडर बदलना पड़ रहा है।
इस वजह से स्वास्थ्यकर्मियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है, वहीं मरीजों और उनके परिजनों की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है। वही अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई की अस्थायी व्यवस्था एक किसी बड़े खतरे से कम नहीं मानी जा रही।
बाहर से मंगाए जा रहे ऑक्सीजन सिलेंडर
सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाए जा रहे हैं। इसे लेकर विभागीय स्तर पर सांठगांठ और कमीशनखोरी की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
आरोप लगाए जा रहे हैं कि सिलेंडर सप्लाई में मोटे कमीशन के कारण ऑक्सीजन प्लांट के नियमित रखरखाव को गंभीरता से नहीं लिया जाता। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सिर्फ एक कर्मी के भरोसे दो बड़े प्लांट
जानकारी के मुताबिक, सदर अस्पताल में लगे दोनों ऑक्सीजन प्लांट की देखरेख के लिए केवल एक कर्मी की तैनाती की गई है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े ऑक्सीजन प्लांट के संचालन और रखरखाव के लिए कम से कम चार प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्टाफ की भारी कमी भी प्लांट खराब होने की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
जमुई सदर अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा
सदर अस्पताल के प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय ने बताया है कि ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी आई है। टेक्निशियन को बुलाया गया है और उसके पहुंचते ही मरम्मत का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि एक से दो दिनों के भीतर दोनों ऑक्सीजन प्लांट को फिर से चालू कर दिया जाएगा ताकि मरीजों को सामान्य तरीके से ऑक्सीजन सप्लाई मिल सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
जमुई सदर अस्पताल में ऑक्सीजन का प्लांट बंद होने की घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। वही करोड़ों रुपये खर्च कर के लगाए गए प्लांट अगर समय पर मेंटेन नहीं हो पा रहे हैं, तो यह स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को समय रहते प्लांट की मरम्मत और तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े।
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Edited and Written by : Chandan Patel.
