शिकायतों के बावजूद नहीं हुई मरम्मत, ग्रामीणों में नाराजगी
गिद्धौर (जमुई): बिहार सरकार की मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत गिद्धौर प्रखंड की सेवा पंचायत के सभी 14 वार्डों में कुल 140 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं।
योजना का उद्देश्य गांवों में रात के समय रोशनी उपलब्ध कराना और ग्रामीणों की सुरक्षा बढ़ाना था। लेकिन अब ये लाइटें ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। पंचायत के अधिकांश वार्डों में लगी सोलर लाइटें कई दिनों से खराब पड़ी हैं, जिससे रात में अंधेरा पसरा रहता है।
हर वार्ड में लगी 10-10 लाइटें, लेकिन ज्यादातर बंद
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के सभी 14 वार्डों में 10-10 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। पंचायत सरकार भवन के बाहर भी लाइट लगाई गई है। शुरुआती दिनों में कुछ लाइटें जलीं, लेकिन धीरे-धीरे अधिकांश खराब हो गईं। अब स्थिति यह है कि गांव की गलियां और मुख्य रास्ते रात में अंधेरे में डूबे रहते हैं।

रात में बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
स्थानीय ग्रामीण गिरधारी पंडित, शंकर साव और धर्मेंद्र पंडित समेत कई लोगों ने बताया है कि लाइट खराब होने से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रात में आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि योजना अच्छी थी, लेकिन रखरखाव नहीं होने से इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कोई भी कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि खराब लाइटों की शिकायत कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित एजेंसी से की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि एजेंसी के जिम्मेदार लोग फोन तक नहीं उठाते हैं।
नियमों के अनुसार खराब सोलर लाइट को 72 घंटे के भीतर ठीक किया जाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर तो हफ्तों से लाइट खराब पड़ी है।
मुखिया ने भी स्वीकार की समस्या
सेवा पंचायत के मुखिया रामाशीष साह ने बताया कि पंचायत के सभी वार्डों में सोलर स्ट्रीट लाइट लग चुकी हैं, लेकिन अधिकांश लाइटें खराब हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग और एजेंसी को कई बार जानकारी दी गई है, बावजूद इसके अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है।
5 साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी थी एजेंसी की
मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत लाइट लगाने वाली एजेंसी को 5 वर्षों तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है। खराब लाइट की सूचना CMS सिस्टम के जरिए कंट्रोल रूम तक पहुंचती है और 72 घंटे के भीतर मरम्मत का प्रावधान है।
इसके बावजूद सेवा पंचायत में लंबे समय से लाइट खराब रहना एजेंसी की कार्यशैली और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। नियमों के अनुसार देरी होने पर प्रति लाइट प्रतिदिन 10 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द खराब सोलर लाइटों की मरम्मत कराने की मांग की है ताकि गांवों में फिर से रोशनी बहाल हो सके और लोगों को राहत मिल सके।
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Reported by: Bikki Kumar
Edited and Written by : Chandan Patel.
