गिद्धौर (जमुई) से बड़ी खबर! जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत मौरा गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां चमकी बुखार से पीड़ित 12 वर्षीय बालक गगन कुमार की इलाज के अभाव में मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
हेल्थ सेंटर बंद मिला, मजबूरी में झोला छाप का सहारा
मृतक गगन कुमार के परिजनों ने बताया कि जब बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ी तो वे उसे इलाज के लिए मौरा स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर लेकर पहुंचे। लेकिन वहां ताला लटका मिला। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर परिजन गांव के एक झोला छाप डॉक्टर मोहम्मद वसीम के पास पहुंचे। आरोप है कि डॉक्टर द्वारा सुई लगाने के तुरंत बाद ही बच्चे की हालत और बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने किया मृत घोषित
घबराए परिजन तुरंत बच्चे को गिद्धौर दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गिद्धौर लेकर पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस खबर के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई और माहौल गमगीन हो गया।
परिजनों का फूटा गुस्सा, स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप
बेटे की मौत से टूट चुके परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अगर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खुला होता और समय पर सही इलाज मिल जाता, तो शायद गगन की जान बच सकती थी।
स्थानीय ग्रामीण अनिल रावत ने भी कहा कि यह घटना सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का परिणाम है।
डॉक्टर ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
गिद्धौर दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को अस्पताल मृत अवस्था में ही लाया गया था।
उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओर से हर संभव प्रयास किया जाता है, लेकिन इस मामले में बच्चा पहले ही दम तोड़ चुका था।
जांच के आदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नरोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि मौरा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बंद क्यों था, इसकी जांच कराई जाएगी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने शुरू की जांच, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
गिद्धौर थाना अध्यक्ष राशि मालिक ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। परिजनों ने थाना में आवेदन देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इस दर्दनाक घटना के बाद मौरा गांव में शोक की लहर है। गगन की मां सरिता देवी और पिता रमेश शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की असमय मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। गांव के लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस मामले में जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।
सिस्टम की लापरवाही ने छीनी एक मासूम की जान?
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र समय पर खुला होता, तो क्या गगन की जान बच सकती थी?
अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और उसके परिणाम पर टिकी हैं।
