गिद्धौर (जमुई) |विशेष रिपोर्ट|गिद्धौर स्थित दिग्विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। बुधवार सुबह जो तस्वीर सामने आई, उसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुबह से ही मरीजों की भीड़, लेकिन डॉक्टर गायब
बुधवार सुबह करीब 8:46 बजे अस्पताल परिसर में मरीजों की लंबी कतार लगी थी। लोग पर्ची कटवाने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे थे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि सुबह 8:48 बजे तक डॉक्टरों के कक्ष खाली पड़े थे। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार जिन चिकित्सकों को सुबह 8 बजे तक उपस्थित रहना था, उनकी कुर्सियां 8:45 बजे तक सूनी थीं। अस्पताल की पूरी व्यवस्था केवल गार्ड और कुछ इक्का-दुक्का स्वास्थ्यकर्मियों के भरोसे चल रही थी।
दूर-दराज से आए मरीजों की बढ़ी परेशानी
मौरा, घुघुलडीह, कवाल जैसे दूरस्थ गांवों से आए मरीज अस्पताल की इस लचर व्यवस्था से काफी नाराज दिखे। कई मरीजों ने बताया कि वे सुबह-सुबह इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन यहां आकर सिर्फ निराशा हाथ लगी।
मरीजों का कहना था कि
“हम गरीब लोग हैं, समय और पैसे दोनों खर्च कर यहां आते हैं, लेकिन डॉक्टर ही नहीं मिलते तो इलाज कैसे होगा?”
लोग पर्ची कटवाने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे
एक दिन की नहीं, रोज की समस्या
यह कोई एक दिन की घटना नहीं है। अस्पताल में अनियमितता, लापरवाही और कर्मचारियों की अकर्मण्यता की शिकायतें पहले भी लगातार सामने आती रही हैं। कभी डॉक्टरों की अनुपस्थिति, कभी दवाओं की कमी, तो कभी सफाई व्यवस्था की बदहाली—यहां समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में सुधार के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
जिम्मेदारों का बयान: सुधार का भरोसा
इस पूरे मामले पर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नरोत्तम ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि
“ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों और कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी और स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।”
बड़ा सवाल: कब सुधरेगी गिद्धौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था?
गिद्धौर का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हजारों लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का मुख्य आधार है। ऐसे में यहां की बदहाली सीधे आम जनता के जीवन पर असर डाल रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या केवल आश्वासन से हालात सुधरेंगे या फिर वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
जब तक इस तरह की लापरवाही पर सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक मरीजों की परेशानी यूं ही जारी रहेगी।
Report By: Vikki Kumar
Edited and Written by : Chandan Patel
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