जमुई (बरहट): जिले के बरहट प्रखंड स्थित मलयपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र की हालत आज भी चिंता का विषय बनी हुई है। एक ओर सरकारी कागजों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी सच्चाई मरीजों के दर्द और सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर रही है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यहां प्रसव (डिलीवरी) जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवा लगभग ठप पड़ी है, जिससे गर्भवती महिलाओं को भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी सेवा बंद, जोखिम में मां और नवजात की जिंदगी

मलयपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी सेवा बंद रहने से स्थानीय महिलाओं को प्रसव के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार समय पर वाहन नहीं मिलने या आर्थिक तंगी के कारण परिवार असमंजस में पड़ जाता है। ऐसे हालात में मां और नवजात दोनों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है।

एक ही कमरे में ओपीडी, रजिस्ट्रेशन और दवा वितरण

अस्पताल की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ओपीडी, मरीजों का पंजीकरण और दवा वितरण—all-in-one—एक ही कमरे में किया जा रहा है। यही नहीं, इसी कमरे में दवाइयों का भंडारण और जरूरी दस्तावेज भी रखे जाते हैं। इससे न केवल अव्यवस्था फैलती है, बल्कि मरीजों की गोपनीयता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

स्वास्थ्य
एक ही कमरे में ओपीडी, रजिस्ट्रेशन और दवा वितरण

मेडिकल कचरे का अंबार, संक्रमण का बढ़ता खतरा

अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। मेडिकल कचरा, खाली दवा के डिब्बे और अन्य अपशिष्ट खुले में फेंके जा रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि मरीजों और आसपास के लोगों के लिए संक्रमण का खतरा भी बढ़ा रहा है।

झाड़-झंखाड़ और जहरीले जीवों का डर

अस्पताल के पीछे झाड़-झंखाड़ और जंगली घास उग आई है। ऐसे में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा लगातार बना रहता है। सोचने वाली बात है कि जहां लोगों को इलाज और सुरक्षा मिलनी चाहिए, वहीं उन्हें डर और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश में जलजमाव, हालात और बदतर

हल्की बारिश में ही अस्पताल परिसर में जलजमाव हो जाता है। कीचड़ और पानी के बीच मरीजों को चलना पड़ता है, जो किसी भी दृष्टिकोण से सुरक्षित नहीं है।
यह स्थिति स्वास्थ्य केंद्र की मूलभूत संरचना पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अधिकारियों की नाराजगी, लेकिन सुधार की उम्मीद धुंधली

हाल ही में जिला चिकित्सा पदाधिकारी ने आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में इस बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई थी।
लेकिन दुखद पहलू यह है कि समस्याओं को स्वीकार कर समाधान निकालने के बजाय उन्हें टालने की कोशिश की गई। इससे यह साफ होता है कि फिलहाल सुधार की उम्मीद बहुत कम नजर आ रही है।

सवाल सिस्टम से: आखिर कब बदलेगी तस्वीर?

  • मलयपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति सिर्फ एक अस्पताल की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है।
  • क्या गरीब और ग्रामीण इलाकों के लोगों को बेहतर इलाज का हक नहीं है?
  • क्या कागजों पर योजनाएं बनाकर ही जिम्मेदारियां पूरी हो जाती हैं?

बदलाव की सख्त जरूरत

अब समय आ गया है कि प्रशासन सिर्फ बैठकों और कागजी कार्रवाई से आगे बढ़े और जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए।
मलयपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को दूर करना न केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी है, बल्कि यह मानवता के प्रति एक कर्तव्य भी है।

अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो इसका खामियाजा उन गरीब परिवारों को भुगतना पड़ेगा, जिनके लिए यह स्वास्थ्य केंद्र ही एकमात्र सहारा है।

देश दुनिया की खबरों की अपडेट के लिए AVN News पर बने रहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *