जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड के अधिकतर गांव आज एक गंभीर संकट से गुजर रहे हैं—घटता जल स्तर। कभी जहां हैंडपंप और कुएं सालभर पानी देते थे, आज वही सूखते नजर आ रहे हैं। गांव के लोगों के लिए पानी अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि रोज की जंग बन चुका है।

भूजल स्तर में लगातार गिरावट—क्या कहते हैं आंकड़े

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में भूजल स्तर तेजी से नीचे गया है। अनियमित बारिश, जल संरक्षण की कमी और बेतहाशा नदियों से बालू खनन, बरसात के पानी का संरक्षण करने की व्यवस्था न होना और बोरिंग इसका मुख्य कारण है। पहले जहां 20-30 फीट पर पानी मिल जाता था, अब 80-100 फीट तक भी पानी नहीं मिल रहा।

महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

गांव की महिलाएं और बच्चे इस संकट का सबसे बड़ा बोझ उठा रहे हैं। सुबह होते ही पानी की तलाश में निकलना उनकी दिनचर्या बन गई है। कई बार तो उन्हें 1-2 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चे भी अब पानी ढोने में लग जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

गांव
नदी में गड्ढा खोदकर पानी निकालते हुए महिला और बच्चे

सूखते खेत, घटती फसल—किसानों की बढ़ी परेशानी

पानी की कमी का असर खेती पर भी साफ दिख रहा है। सिंचाई के अभाव में खेत सूख रहे हैं और फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसान महंगे डीजल पंप का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है और मुनाफा घटता जा रहा है।

सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित?

सरकार द्वारा कई जल संरक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। कई जगहों पर न तो समय पर काम हुआ और न ही उसकी निगरानी। नल-जल योजना भी कई गांवों में अधूरी पड़ी है या ठीक से काम नहीं कर रही।

गांव वालों की मांग—स्थायी समाधान चाहिए

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। जल संरक्षण के लिए तालाबों की खुदाई, वर्षा जल संचयन और पुराने कुओं की सफाई जैसे उपायों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

भावनात्मक सच—पानी के बिना अधूरी जिंदगी

गांव की एक बुजुर्ग महिला की आंखों में आंसू थे, उन्होंने कहा—

“पहले कभी सोचे नहीं थे कि पानी के लिए भी तरसना पड़ेगा। अब तो हर दिन बस यही सोचते हैं कि आज पानी मिलेगा या नहीं।”

यह सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि पूरे गिद्धौर की आवाज है।

अब नहीं चेते तो देर हो जाएगी

अगर समय रहते इस समस्या पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। जरूरत है कि प्रशासन और समाज मिलकर इस संकट से निपटने के लिए ठोस पहल करें।

(यह खबर गिद्धौर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष जारी है।)

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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