बिहार के जमुई स्थित सदर अस्पताल जमुई में गुरुवार की रात करीब 10 बजे अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब सूचना मिलने पर एसडीओ सौरव कुमार खुद अस्पताल पहुंच गए।
एसडीओ सीधे प्रसव कक्ष के पास पहुंचे, जहां संदिग्ध अवस्था में घूम रही दो आशा कर्मियों को पकड़कर टाउन थाना जमुई की पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ अस्पताल परिसर को हिला दिया, बल्कि आम लोगों के मन में भी कई सवाल खड़े कर दिए।
मातृत्व वार्ड में संदिग्ध गतिविधि, प्रशासन हुआ सतर्क
सूत्रों के मुताबिक अस्पताल प्रशासन को प्रसव कक्ष के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। उसी सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीओ मौके पर पहुंचे।
यह वही जगह है, जहां गर्भवती महिलाएं दर्द और उम्मीद के बीच जीवन को जन्म देती हैं। ऐसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की गतिविधि होना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा देता है।
दो मेडिकल दुकानें सील, कागजात नहीं दिखा पाए संचालक
इसके बाद प्रशासनिक टीम सदर अस्पताल के सामने स्थित महर्षि मेडिकल और नालंदा मेडिकल पहुंची। ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा आवश्यक कागजात मांगे गए, लेकिन संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
एसडीओ के निर्देश पर दोनों मेडिकल दुकानों को जांच पूरी होने तक सील कर दिया गया।
जमुई एसडीओ का बयान
एसडीओ सौरव कुमार ने बताया कि अस्पताल प्रशासन से सूचना मिलने के बाद दो आशा कर्मियों को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा गया है। साथ ही मेडिकल दुकानों द्वारा जरूरी कागजात नहीं दिखाने पर उन्हें सील किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम विस्तृत जांच कर रही है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
यह घटना सिर्फ दो आशा कर्मियों या दो मेडिकल दुकानों तक सीमित नहीं है — यह हमारे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की गहरी खामियों को उजागर करती है।
जहां एक ओर गरीब और ग्रामीण परिवार सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करके आते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि इसी व्यवस्था के भीतर दलाली या अनियमितता पनप रही हो, तो यह भरोसा टूटने लगता है।
एक मां जब अस्पताल आती है, तो वह सिर्फ इलाज नहीं, सुरक्षा और सम्मान भी चाहती है।
जरूरत है सख्त निगरानी और जवाबदेही की
अब समय आ गया है कि ऐसे मामलों में सिर्फ तात्कालिक कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी निगरानी तंत्र बनाया जाए।
हर उस हाथ को जवाबदेह ठहराया जाए जो मरीजों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाता है।
क्योंकि स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं — यह इंसानियत की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
