दिल्ली मेट्रो को राजधानी की जीवनरेखा कहा जाता है। रोज़ लाखों लोग समय पर दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल पहुंचने के लिए मेट्रो पर भरोसा करते हैं। लेकिन गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन पर एंट्री के समय लगने वाली लंबी-लंबी लाइनों ने इस भरोसे को रोज़ाना की परेशानी में बदल दिया है।
सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में गोविंदपुरी स्टेशन के बाहर का नज़ारा बेहद ही चिंताजनक होता है। एंट्री गेट पर सुरक्षा जांच और टिकट स्कैन के लिए इतनी लंबी कतारें लग जाती हैं कि लोगों को 15–30 मिनट तक सिर्फ स्टेशन में घुसने के लिए इंतजार करना पड़ता है। दफ्तर जाने वाला कर्मचारी घड़ी देख-देखकर परेशान होता है, छात्र परीक्षा या क्लास के लिए घबराया रहता है और बुज़ुर्गों व महिलाओं के लिए इस भीड़ में खड़ा रहना और भी मुश्किल हो जाता है।
सबसे दुखद बात यह है कि यह समस्या नई नहीं है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर रोज़ाना यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके हिसाब से एंट्री गेट, सिक्योरिटी स्टाफ और मैनेजमेंट में कोई खास सुधार नहीं किया गया है। कई बार कुछ गेट बंद रहते हैं, जिससे दबाव कुछ ही गेटों पर आ जाता है और अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है।
दिल्ली मेट्रो से सफर करने वाला आम आदमी
भावनात्मक पहलू यह है कि मेट्रो से सफर करने वाला आम आदमी पहले से ही महंगाई, नौकरी का दबाव और समय की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में स्टेशन पर घंटों लाइन में खड़ा रहना उसकी मानसिक थकान को और बढ़ा देता है। कई यात्रियों का कहना है कि वे जानबूझकर घर से पहले निकलते हैं, फिर भी लेट हो जाते हैं और ऑफिस में जवाब देना पड़ता है—गलती उनकी नहीं, व्यवस्था की होती है।
सुरक्षा व्यवस्था ज़रूरी है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन बेहतर प्लानिंग, सभी एंट्री गेट चालू रखना, अतिरिक्त सिक्योरिटी स्टाफ तैनात करना और पीक ऑवर्स में लाइन मैनेजमेंट के लिए अलग कर्मचारी रखना भी उतना ही ज़रूरी है। दिल्ली मेट्रो ने तकनीक और सुविधा के मामले में हमेशा मिसाल कायम की है, इसलिए जनता को उम्मीद है कि गोविंदपुरी जैसे व्यस्त स्टेशन की इस समस्या पर भी जल्द ध्यान दिया जाएगा।
आखिरकार सवाल यही है—क्या आम जनता की रोज़ की परेशानी सिर्फ “रूटीन प्रॉब्लम” बनकर रह जाएगी, या जिम्मेदार अधिकारी समय रहते इस पर ठोस कदम उठाएंगे? गोविंदपुरी स्टेशन पर खड़ी लंबी लाइनें सिर्फ यात्रियों की भीड़ नहीं, बल्कि बेहतर मैनेजमेंट की मांग करती हुई आवाज़ हैं।
