अंत में कुछ

अंत में कुछ भी.. 

अंत..

अंत में सब कुछ ठीक नहीं होता,
अंत में बस अंत ही होता है!..

कुछ अधूरे ख्वाब जल जाते हैं,
कुछ सवालों का मौन रोता है!..

जो कहा न गया, वह राख बनता है,
जो जिया न गया, वह याद बनता है!..

अंत में तर्क नहीं बचते कोई,
बस एक चिता और धुआँ उठता है!..

लोग कहते हैं — सब ठीक हो जाएगा,
पर अंत में केवल विदाई होती है!..

अंत में सब कुछ नहीं सँवरता,
अंत में केवल अंतिम संस्कार होता है!..

अंत में कुछ

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Note :-

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By: KP
Edited  by: KP

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