बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए शुक्रवार यानी 17 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है. वही इस बीच बिहार में महागठबंधन के भीतर गुरुवार देर रात में सीटों का बंटवारा हो गया. वही इस बंटवारे में मुकेश सहनी की वीआईपी (VIP) को केवल 15 सीटें मिली हैं. यह वही मुकेश सहनी हैं जो 40 से कम सीटों पर लड़ने को लेकर अड़े हुए थे. लेकिन, आखिरी घड़ी में यह समझौता हुआ और मुकेश सहनी आज शुक्रवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुकेश सहनी इतनी कम सीटों के लिए कैसे तैयार हुए. वह खुद को सन ऑफ मल्लाह कहते हैं. वह दावा करते हैं कि बिहार में उनके समुदाय की आबादी 12 से 15 फीसदी हैं और समाज पर उनका अच्छा प्रभाव है. लेकिन, उनकी कमजोरी यह है कि वह खुद को बड़ा नेता बनाते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के पास कोई विधायक नहीं हैं.
बीते चुनाव में सीटों के बंटवारे से नाराज होकर उन्होंने अंतिम क्षण में बिहार महागठबंधन छोड़ दिया था. फिर वह एनडीए में शामिल हो गए और 11 सीटों पर चुनाव लड़ा. उनके चार नेता विधायक भी बने लेकिन चुनाव जीतते ही उन सभी ने सहनी का साथ छोड़ दिया. वे सभी भाजपा में शामिल हो गए. इस कारण इस चुनाव में सहनी के पास कोई बार्गेनिंग पावर नहीं बचा था. वही उनके पास 40 सीटें के दावे के पीछे कोई पुख्ता तर्क नहीं था. ऐसे में उनको केवल 15 सीटों पर ही समझौता करना पड़ा है. हालांकि, 15 सीटों के साथ साथ सहनी ने राजद नेता तेजस्वी यादव से कुछ वादे लेने में सफल हुए है.
बिहार में देर रात में हुआ फैसला
सूत्रों के मुताबिक अंतिम घड़ी तक चली इस बार्गेनिंग में राजद नेता ने उनको राज्यसभा की एक सीट और विधान परिषद में दो सीटें देने की भी बात कही है. हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक कांग्रेस और राजद की सीटों का खुलासा नहीं हुआ है. आज नामांकन की आखिरी तारीख है लेकिन, स्पष्ट नहीं है कि राजद और कांग्रेस कितनी सीटों पर मैदान में उतर रहे हैं.
वीआईपी सुप्रीमों मुकेश सहनी को लेकर गुरुवार पूरे दिन खूब ड्रामे चले. वह 12 बजे, कभी 4 बजे और फिर शाम 6 बजे प्रेस कांफ्रेंस करने वाले थे लेकिन उनका प्रेस कांफ्रेस बार-बार टलता रहा. ऐसी भी रिपोर्ट आई कि मुकेश सहनी को मनाने के लिए राहुल गांधी ने खुद फोन किया और फिर दिल्ली में तेजस्वी के बेहद खास नेता और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबी बातचीत हुई. फिर देर में सीट बंटवारे पर फैसला लिया गया.

