बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाला है और राजनीति में जुबान अक्सर तलवार से भी ज्यादा तेज चलती है। यही वजह है कि बिहार मुजफ्फरपुर के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एनडीए (NDA) के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और सकरा के पूर्व विधायक बसावन प्रसाद भगत ने कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष लोकसभा राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने मंच से अपने संबोधन में राहुल गांधी को मोहम्मद अली जिन्ना की औलाद तक कह डाला।
कार्यकर्ता सम्मेलन में बिहार सरकार के मंत्री हरि सहनी, साहेबगंज के भाजपा विधायक व मंत्री राजू कुमार सिंह समेत कई दिग्गज नेता मंच पर मौजूद रहे। इसी दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में पूर्व मंत्री बसावन भगत ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जिन्ना की औलाद हैं।

उन्होंने आगे कहा है कि राहुल गांधी एक धर्म को प्रमोट करते हैं और भाजपा व एनडीए सरकार के कार्यों पर लगातार सवाल उठाते रहते हैं। सच्चाई यह है कि वे विपक्ष के ऐसे नेता हैं जिन्हें हमारी सरकार की कार्यशैली और जनता के बीच मिल रही लोकप्रियता से नफरत है।
राजनीति या नफ़रत की ज़ुबान?
भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती यह है कि यहां हर किसी को अपनी राय रखने की आज़ादी है। लेकिन जब नेताओं की ज़ुबान समाज को बांटने लगे, किसी की आस्था या पहचान को ठेस पहुंचाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। राहुल गांधी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेता हैं। उनके खिलाफ राजनीतिक आरोप लगाना अलग बात है, मगर किसी को “जिन्ना की औलाद” कहना सीधे-सीधे नफ़रत की राजनीति को हवा देना है।
बिहार में जनता का दर्द
आज बिहार के नौजवान बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, किसान कर्ज़ में डूबे हुए हैं, महंगाई आसमान छू रही है। इन मुद्दों पर चर्चा करने की बजाय नेता अगर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करेंगे, तो जनता के घाव और गहरे होंगे। जनता चाहती है कि नेता उनके भविष्य की बात करें, उनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और उनके परिवार की सुरक्षा की बात करें।
क्या ऐसे बयान लोकतंत्र को मजबूत करेंगे?
भारत हमेशा से विविधताओं में एकता का प्रतीक रहा है। जिन्ना का नाम सुनते ही देश का बंटवारा और लाखों लोगों का दर्द याद आता है। ऐसे में किसी भारतीय नेता को “जिन्ना की औलाद” कहना उन ज़ख्मों को कुरेदने जैसा है, जिन्हें समय ने मुश्किल से भरा था। राजनीति में मतभेद होना चाहिए, मगर गालियों और अपमान तक पहुंचना लोकतंत्र को कमजोर करता है।
नतीजा : यह बयान राजनीति में गरमी जरूर लाएगा
बसावन भगत का यह बयान राजनीति में गरमी जरूर लाएगा, लेकिन इससे समाज में नफ़रत और दूरी भी बढ़ सकती है। नेताओं को याद रखना चाहिए कि उनकी जुबान से निकला हर शब्द करोड़ों लोगों के दिल को छूता है। राजनीति में विरोध हो सकता है, लेकिन वह विचारों का होना चाहिए, रिश्तों और इंसानियत का नहीं।
सवाल अब जनता के सामने है – क्या हम ऐसे बयानों को ताली देंगे या नेताओं से जवाब मांगेंगे कि वो असल मुद्दों पर क्यों नहीं बोलते?
