पूजा थी घर में, पीरियड रोकने की ली गोली… फिर आधी रात में चली गई 18 साल की बेटी की जान..
कर्नाटक से आई एक बेहद चौंकाने वाली दुखद घटना है, इस घटना ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कि एक जरा सा अंधविश्वश् और थोड़ी से लापरवाही किसी की जन ले सकती है, एक 18 साल की लड़की ने घर में पूजा होने के कारण पीरियड्स (महावारी) रोकने के लिए हार्मोनल दवा खा ली। कुछ ही दिनों में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और आखिरकार इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी मौत हो गई। आइए जानते हैं इस घटना की पूरी कहानी और इसके पीछे की मेडिकल सच्चाई क्या है।
घर में पूजा, पीरियड्स टालने के लिए खा ली हार्मोनल गोली
कर्नाटक की रहने वाली 18 साल की एक लड़की के घर में धार्मिक पूजा का आयोजन था। ऐसे समय में पीरियड्स आने से बचने के लिए उसने हार्मोनल दवा ले ली ताकि वे पूजा में हिस्सा लिया जा सके। ये गोलियां अक्सर मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से मिल जाती हैं और कई महिलाएं इनका इस्तेमाल करती हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन बेहद खतरनाक साबित हो सकता है – जैसा कि इस लड़की के साथ हुआ।
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पैर में दर्द और सूजन से शुरू हुई तकलीफ
कुछ दिनों के बाद लड़की को पैर और जांघ में तेज़ दर्द और सूजन होने लगी। वह बहुत बेचैन महसूस कर रही थी। परेशान होकर वह अपने दोस्तों के साथ डॉक्टर के पास गई। वैस्कुलर सर्जन डॉ. विवेकानंद ने लड़की की जांच की और बातचीत के दौरान लड़की ने बताया कि उसने पीरियड्स रोकने की हार्मोनल दवा ली थी। डॉक्टर को शक हुआ और उन्होंने तुरंत जांच करवाई – जैसे खून की जांच, डॉप्लार स्कैन और अन्य टेस्ट करवाए गए।
DVT – नसों में खून का थक्का (Blood Clot) बन गया था
जांच में पता चला कि लड़की को डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep Vein Thrombosis – DVT) हो गया है। यानी उसके शरीर की नसों में खून का थक्का (Blood Clot) जम गया था, जो उसके नाभि तक फैल चुका था। यह स्थिति बेहद गंभीर थी, क्योंकि यह थक्का फेफड़ों, दिल या मस्तिष्क तक पहुंच जाए तो व्यक्ति की जान मिनटों में जा सकती है।
डॉक्टर ने अस्पताल में लड़की को भर्ती करने को कहा, लेकिन उसके पिता ने टाल दिया
डॉ. ने लड़की के पिता को बहुत समझाया कि इसकी हालात बेहद गंभीर हैं और इसे तुरंत भर्ती करना बेहद जरूरी है। लेकिन लड़की के पिता ने कहा कि वे अगले दिन मां के साथ बेटी को दोबारा अस्पताल लेकर आएंगे। डॉक्टर ने उन्हें इस स्थिति की गंभीरता बताई, लेकिन पिता नहीं माने।
आधी रात को बिगड़ी बेटी की तबीयत, लेकिन बेटी को बचाया नहीं जा सका
उसी रात करीब 2 बजे, डॉक्टर को कॉल आया कि लड़की की हालात बेदद गंभीर और इमरजेंसी में लाया गया है। लड़की की सांसें रुक रही थीं। डॉक्टरों ने CPR और तमाम कोशिशें कीं, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में 18 साल की वो बच्ची दुनिया को अलविदा कह गई।
क्या है सीख इस घटना से?
पीरियड्स कोई बीमारी नहीं है। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे रोकना या छिपाना नहीं चाहिए, बल्कि स्वाभाविक रूप से इसे स्वीकार करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह लिए हार्मोनल के दवा खाना बेहद खतरनाक हो सकता है। DVT (Deep Vein Thrombosis) जैसी बीमारियां दिखने में आम सी लग सकती हैं, लेकिन ये जानलेवा होती हैं। लेकिन, घरवालों को भी चाहिए कि मेडिकल सलाह को बड़ी गंभीरता से लें। कभी-कभी थोड़ी से देरी बहुत भारी पड़ जाती है, एक पूरी ज़िंदगी पर ।
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हमरे स्वास्थ्य से बड़ा कोई रीति-रिवाज नहीं
पूजा-पाठ, समाज और परंपराएं अपनी जगह हैं, लेकिन स्वास्थ्य और जीवन सबसे पहले आती है। किसी धार्मिक कारण या सामाजिक दबाव में आकर शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को रोका नहीं जाना चाहिए। यह घटना हर माता-पिता, बेटी और परिवार के लिए एक चेतावनी है, ताकि ऐसी गलती दोबारा न हो।
इस घटना से उठते अहम सवाल:
1. महिला स्वास्थ्य और जागरूकता की कमी
- हार्मोनल दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है। इन्हें लेने से हार्मोन असंतुलन, रक्त के थक्के (Blood Clots), लिवर या किडनी पर असर, और यहां तक कि जान भी जा सकती है।
- किशोरियों और युवतियों को उनके शरीर और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है।
2. पीरियड्स (मासिक धर्म) को लेकर सामाजिक वर्जनाएं (प्रतिबंध)
- आज भी कई परिवारों में पीरियड्स को “अपवित्र” माना जाता है।
- महिलाओं को इन दिनों में पूजा, रसोई या सामाजिक गतिविधियों से दूर रखा जाता है, जिससे वे स्वयं को नीचा या अलग महसूस करती हैं।
3. माता-पिता और समाज की भूमिका
- जब तक परिवार और समाज इन रूढ़ियों को तोड़ने की पहल नहीं करेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
- लड़की पर इतना दबाव क्यों था कि उसने अपनी जान जोखिम में डाल दी?
समाधान की दिशा में कदम:
- शिक्षा और संवाद: स्कूलों और घरों में किशोरियों को पीरियड्स, प्रजनन स्वास्थ्य और हार्मोनल दवाओं के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए।
- मिथकों को तोड़ना: समाज में पीरियड्स से जुड़े अंधविश्वासों और वर्जनाओं को खत्म करना जरूरी है।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच: हर लड़की को सुरक्षित, वैज्ञानिक और भरोसेमंद मेडिकल सलाह तक पहुंच मिलनी चाहिए।
निष्कर्ष:
यह घटना सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं है — यह हमारी सोच, हमारे सामाजिक दबाव और हमारी चुप्पी का परिणाम है।
यदि उस लड़की को यह एहसास कराया गया होता कि पीरियड्स के दौरान पूजा में शामिल न होना कोई अपराध नहीं है, तो शायद आज वह जिंदा होती।
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Note :-
सुझाव:- यह ब्लॉग सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है. अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं या आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो कृपया डॉक्टर से परामर्श जरूर लें और डॉक्टर के सुझावों के आधार पर ही कोई निर्णय लें.
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