भारतीय कानून में अपराध व जुर्म करने पर कौन-कौन सी धाराएं लगती हैं? 

भारतीय कानून में अपराध व जुर्म करने पर कौन-कौन सी धाराएं लगती हैं?- जानें

भारतीय कानून में अपराध व जुर्म करने पर यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपराध का प्रकार क्या है। भारतीय न्यायिक संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita -BNS), 1860 के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के अपराधों के लिए अलग-अलग धाराएं निर्धारित की गई हैं।

इस लेख में संक्षिप्त मे जानकारी दे रहे हैं जो सामान्य अपराधों और उन पर लागू होने वाली धाराओं को समझने में मदद करेगी:

भारतीय कानून में अपराध व जुर्म करने पर कौन सी धाराएं लगती हैं? भारतीय न्यायिक संहिता (BNS) के तहत अपराधों को कई वर्गों में बांटा गया है, जैसे:

भारतीय कानून में अपराध व जुर्म करने पर कौन-कौन सी धाराएं लगती हैं? 

  1. व्यक्तिगत अपराध (Against Person):

यह वो अपराध होते हैं जो किसी व्यक्ति के जीवन, शरीर, स्वतंत्रता या प्रतिष्ठा पर आघात करते हैं।

धारा 302 – हत्या (Murder)

धारा 307 – हत्या की कोशिश (Attempt to Murder)

धारा 304 – गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide not amounting to Murder)

धारा 323 – साधारण मारपीट

धारा 326 – खतरनाक हथियार से गंभीर चोट

महिला संबंधी अपराध:

धारा 354 – महिला का शीलभंग (Molestation) महिला की गरिमा का हनन

धारा 376 – बलात्कार (Rape) महिला की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाना

धारा 498A – दहेज (Dowry) के लिए प्रताड़ना  विवाह के बाद महिला को प्रताड़ित करना

  1. संपत्ति से संबंधित अपराध (Against Property):

धारा 379 – चोरी (Theft)

धारा 380 – आवास में चोरी

धारा 392 – डकैती (Robbery)

धारा 395 – डकैती करने के लिए गिरोह बनाना (Dacoity)

धारा 420 – धोखाधड़ी (Cheating)

धारा 427 – संपत्ति को क्षति पहुँचाना

  1. राज्य के विरुद्ध अपराध (Against the State):

धारा 121 – देशद्रोह (Waging war against the Government of India)

धारा 124A – राजद्रोह (Sedition)

  1. सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध (Against Public Tranquility):

धारा 141-149 – दंगा व अवैध सभा (Unlawful Assembly, Rioting)

धारा 153A – दो धर्मों के बीच द्वेष फैलाना

  1. झूठी जानकारी या धोखाधड़ी से संबंधित अपराध:

धारा 182 – झूठी जानकारी देना

धारा 193 – झूठी गवाही देना

धारा 465 – जालसाजी (Forgery)

अपराध के अनुसार सजा:

प्रत्येक धारा के अंतर्गत दी जाने वाली सजा अपराध व जुर्म की गंभीरता पर निर्भर करती है। कुछ अपराध जमानती होते हैं, जबकि कुछ गैर-जमानती। अदालत परिस्थिति को देखकर सजा तय करती है, जैसे:

  • जुर्माना
  • कारावास (साधारण/कठोर)
  • उम्रकैद
  • मृत्युदंड (कुछ विशेष मामलों में)

निष्कर्ष:

भारतीय कानून हर नागरिक की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है और अपराध व जुर्म करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज होता है और सजा दी जाती है।

किसी भी मामले में सही जानकारी और मदद के लिए कानूनी सलाह जरूर लें।

यह भी पढ़े : उम्रकैद की सजा से जुड़ी जरुरी जानकारी, कितने वर्ष जेल में बिताता है कैदी?

Note:

Disclaimer: यह आर्टिकल व लेख केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है।  यह आर्टिकल व व प्रकाशक किसी भी त्रुटि या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

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By: KP
Edited  by: KP

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