जमुई जिले में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। अंचल अधिकारी (सीओ) और राजस्व कर्मियों की पहले से जारी हड़ताल के बीच अब पंचायत सचिवों के भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से हालात और गंभीर हो गए हैं। इस तिहरे आंदोलन ने ग्रामीण इलाकों में सरकारी कामकाज को लगभग ठप कर दिया है।
पंचायत सचिवों की हड़ताल से रोजमर्रा के काम प्रभावित
गुरुवार सुबह 10 बजे से शुरू हुई पंचायत सचिवों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हो या वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन—हर जरूरी काम रुक गया है।
राशन कार्ड बनवाने और उसमें सुधार कराने की प्रक्रिया भी पूरी तरह बाधित हो चुकी है।
विकास योजनाओं पर ब्रेक, पंचायत भवनों में सन्नाटा
गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार थम गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा जैसी योजनाएं अधर में लटक गई हैं। पंचायत भवनों में सन्नाटा पसरा हुआ है और फाइलों का निपटारा नहीं हो पा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जो काम कुछ दिनों में हो जाते थे, अब उनके लिए हफ्तों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
दो महीने से जारी राजस्व हड़ताल ने बढ़ाई मुश्किलें
राजस्व कर्मियों की हड़ताल पिछले दो महीनों से जारी है, जिससे जमीन से जुड़े जरूरी काम पहले ही बंद पड़े थे। दाखिल-खारिज, जमीन मापी और परिमार्जन जैसे कार्य ठप हैं। अब पंचायत सचिवों के भी हड़ताल में शामिल होने से समस्या और विकराल हो गई है।
कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर लोग
आम जनता छोटे-छोटे कामों के लिए प्रखंड और अंचल कार्यालयों के चक्कर काट रही है। लेकिन हर जगह ताले और हड़ताल की स्थिति के कारण लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। एक ग्रामीण ने कहा,
“सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए महीनों से भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”

सरकार के लिए ‘त्रिस्तरीय संकट’
अंचल अधिकारी, राजस्व कर्मी और पंचायत सचिव—तीनों स्तर पर हड़ताल ने जिला प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने का दबाव है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों की मांगों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव, बढ़ी चिंता
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने भी माना है कि हड़ताल के कारण सभी जरूरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
जनता की चेतावनी: जल्द समाधान नहीं हुआ तो हालात बिगड़ेंगे
लगातार बढ़ती हड़तालों से जनता में आक्रोश भी बढ़ने लगा है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
सिस्टम की लड़ाई में पिस रही आम जनता
जमुई में जारी यह तिहरी हड़ताल सिर्फ प्रशासनिक संकट नहीं, बल्कि आम जनता के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है।
सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हैं, जबकि आम लोग अपने हक और जरूरी सुविधाओं के लिए भटकने को मजबूर हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और प्रशासन कब तक इस गतिरोध को खत्म कर पाते हैं—क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ जनता की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
