ग्रेटर नोएडा | विशेष रिपोर्ट : बीते शुक्रवार की रात ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 के पास जो हुआ, वह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का भयावह उदाहरण बन गया। भारी जलभराव के बीच सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी से भरे गड्ढे/अंडरपास में जा फंसी और देखते ही देखते युवराज कार समेत मौत के आगोश में चले गए।

हादसे के करीब तीन दिन बाद एनडीआरएफ की टीम ने युवराज की कार को पानी से बाहर निकाला। जब कार बाहर आई, तो उसका मंजर हर किसी की आंखें नम कर देने वाला था। कार के शीशे टूटे हुए थे, सनरूफ क्षतिग्रस्त था और वाहन की हालत यह बयां कर रही थी कि युवराज ने अंदर कितनी भयावह स्थिति का सामना किया होगा।

फॉरेंसिक जांच की तैयारी, हर एंगल से होगी पड़ताल

सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच दल (एसआईटी) अब कार की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रहा है। जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कहीं किसी तकनीकी खराबी ने तो इस हादसे को और भयावह नहीं बना दिया। माना जा रहा है कि पानी के अत्यधिक दबाव के कारण कार के शीशे टूट गए होंगे, जिससे अंदर पानी तेजी से भर गया।

हादसे के बाद जागा नोएडा प्राधिकरण प्रशासन

युवराज की मौत के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हुई। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है, जिसे पांच दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।
मंगलवार से एसआईटी ने जांच शुरू कर दी। टीम ने पहले नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में करीब दो घंटे तक दस्तावेजों की पड़ताल की और फिर घटनास्थल का दौरा किया। वहीं, इस मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विजटाउन के मालिक बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दी मौत की भयावह सच्चाई

युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद हादसे की भयावहता और स्पष्ट हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। डॉक्टरों ने पाया कि युवराज के फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी भरा हुआ था, जिससे यह साबित होता है कि वह काफी देर तक पानी में डूबे रहे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक पानी में रहने से ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक गई, जिससे दम घुटने की स्थिति बनी। इसी दौरान शरीर पर पड़े अत्यधिक दबाव के कारण हार्ट फेलियर हुआ, जो मौत का तत्काल कारण बना।

नोएडा सेक्टर-150 प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

इस हादसे ने स्थानीय प्रशासन, विकास प्राधिकरण और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेक्टर-150 जैसे विकसित इलाके में भारी जलभराव, खुले गड्ढे और बिना चेतावनी के जानलेवा अंडरपास—यह सब क्या एक आम नागरिक की जान से कम अहम था?

एडीजी का बयान

मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर ने कहा,
हमारी एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। शासन के निर्देश पर पांच दिन में रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। सभी संबंधित लोगों से बातचीत की जाएगी और यह देखा जाएगा कि किन परिस्थितियों और कारणों से यह घटना घटी। जांच के बाद प्रशासन को पूरी जानकारी दी जाएगी।

नोएडा
एडीजी भानु भास्कर

एक सवाल जो अब भी बाकी है

युवराज मेहता की मौत सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का इम्तिहान है। सवाल यह है कि क्या जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ फाइलें आगे बढ़ेंगी, या सच में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?

क्योंकि अगर जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह दलदल किसी और की जिंदगी भी निगल सकता है।

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