जमुई जिले के बरहट प्रखंड स्थित कुकुरझप डैम का जलस्तर लगातार गिरने से इलाके की कृषि व्यवस्था यानी खेती गंभीर संकट में आ गई है। कभी यह डैम बरहट, लक्ष्मीपुर होते हुए लखीसराय जिले के कुंदर गांव तक के खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता था, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है।

रबी फसल प्रभावित, गरमा खेती लगभग बंद

डैम के जलस्तर में लगातार गिरावट का सीधा असर अब खेती पर पड़ा है। वहीं इस साल रबी फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है, वहीं गरमा फसल की खेती लगभग ठप हो गई है। खेत सूखने लगे हैं और उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

एक साल से गिर रहा जलस्तर, किसानों की बढ़ी चिंता

स्थानीय किसानों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से डैम का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। दिनेश यादव, ललन यादव, कारू यादव, फौदारी मांझी, विनय सिंह, जवाहर सिंह और दीपेंद्र सिंह समेत कई किसानों ने बताया कि पहले इस जलाशय से साल के तीनों मौसम—खरीफ, रबी और गरमा—की खेती आसानी से हो जाती थी। लेकिन अब पानी की कमी ने पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है।

मछली पालन पर उठे सवाल, पानी निकासी का आरोप

किसानों ने जलस्तर गिरने के पीछे डैम में हो रहे मछली पालन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि संविदा पर मछली पालन करने वाले लोगों ने जलस्तर नियंत्रित रखने के नाम पर लगातार पानी निकालकर आंजन नदी में बहा दिया। इससे डैम का जलस्तर काफी नीचे चला गया और अब स्थिति यह है कि निकास द्वार से भी पानी निकलना बंद हो गया है। किसानों ने इस मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।

केमिकल के उपयोग से मछलियों की मौत

ग्रामीणों का कहना है कि कम पानी और केमिकल के उपयोग के कारण डैम में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई है। मृत मछलियों को बाहर निकालकर फेंक दिया गया, जिससे पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। यह मामला जल प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सिंचाई क्षमता के बावजूद बेकार साबित हो रहा डैम

तकनीकी रूप से कुकुरझप डैम में 6287 हेक्टेयर खरीफ और 1750 हेक्टेयर रबी फसल की सिंचाई की क्षमता है। लेकिन वर्तमान हालात में यह क्षमता पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुकी है। पानी की कमी के कारण किसान इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

खेती
कुकुरझप डैम का जलस्तर लगातार गिरने से इलाके की कृषि व्यवस्था गंभीर संकट में

जल संसाधन विभाग का पक्ष

जल संसाधन विभाग ने जलस्तर कम होने का कारण सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने को बताया है। विभाग का कहना है कि मेंटेनेंस कार्य चल रहा है और इस संबंध में रिपोर्ट भी भेजी गई है।

समाधान की मांग, किसानों में आक्रोश

किसानों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने और डैम में जलस्तर बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में खेती पूरी तरह चौपट हो सकती है।

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By Chandan Patel

चंदन पटेल AVN News से लंबे समय से जुड़े पत्रकार हैं। उन्होंने वर्ष 2020 से रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और जमीनी स्तर की खबरों को प्रमुखता से उठाते हुए लगातार अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे AVN News के एडिटर-इन-चीफ के रूप में समाचार संपादन, कवरेज और डिजिटल पत्रकारिता का नेतृत्व कर रहे हैं। राजनीति, खेल,स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरों को तथ्यपरक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है। उनका उद्देश्य आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देना और विश्वसनीय खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है।

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