जमुई: कुख्यात नक्सली कमांडर सिद्धू कोड़ा उर्फ मुंशी दा की पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत के मामले में अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गड़बड़ी और तथ्यों को छिपाने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक समेत तीन चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद की गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना गुरुवार की शाम करीब 5 बजे सामने आई, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
पुलिस अभिरक्षा में हुई थी सिद्धू कोड़ा की मौत
जारी अधिसूचना के अनुसार चकाई थाना क्षेत्र के नेहालडीह गांव निवासी सिद्धू कोड़ा उर्फ मुंशी दा की 22 फरवरी 2020 को पुलिस अभिरक्षा में मौत हो गई थी। घटना के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी जमुई के आदेश पर पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी, ताकि पूरे मामले की पारदर्शी जांच हो सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिली कई अनियमितताएं
मामले की समीक्षा के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वीडियोग्राफी में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम के दौरान बाहरी व्यक्तियों को स्वतंत्र गवाह के रूप में दर्ज नहीं किया था। इसके अलावा मृतक के शरीर पर मौजूद चोट के निशानों और मृत्यु के कारण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का भी स्पष्ट उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया था।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर कार्रवाई
मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज की गई थी। आयोग ने पूरे मामले की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित तीन चिकित्सकों को निलंबित करने का आदेश जारी किया है।

स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
एक साथ तीन चिकित्सकों पर हुई कार्रवाई से जिले के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई को पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामले की आगे भी जांच जारी रहेगी और यदि अन्य स्तर पर भी लापरवाही सामने आती है तो अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
