पटना/नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट | बिहार की राजनीति आज एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दोपहर 12:15 बजे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह शपथ उन्हें राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन दिलाएंगे। शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार शाम तक दिल्ली से पटना लौट सकते हैं। उनके इस कदम के साथ ही बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
CM पद छोड़ने की तैयारी, नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस गहराया—14 अप्रैल को हो सकता है बड़ा फैसला
CM पद छोड़ने की तैयारी तेज
राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि शपथ के बाद नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाली एनडीए सरकार “नीतीश मॉडल” पर ही काम करेगी, जो पिछले 20 वर्षों से बिहार की राजनीति और विकास की धुरी रहा है।
नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के साथ ही बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इस बीच पटना स्थित BJP दफ्तर के बाहर सम्राट चौधरी को नया मुख्यमंत्री घोषित करने वाले पोस्टर लगाए गए। हालांकि, इनमें से कुछ पोस्टरों को पार्टी कर्मियों द्वारा हटा दिया गया, खासकर वे पोस्टर जिन पर “वाल्मीकि समाज” का उल्लेख था।
दिल्ली में BJP की कोर ग्रुप बैठक आज
नई सरकार के गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने आज दिल्ली में “कोर ग्रुप” की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में केंद्रीय नेतृत्व बिहार के शीर्ष नेताओं के साथ सरकार के स्वरूप और नेतृत्व पर मंथन करेगा।
बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री—
सम्राट चौधरी
विजय कुमार सिन्हा
पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे यह बैठक और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
14 अप्रैल को हो सकता है बड़ा फैसला
सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है। इसी बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
दिल्ली पहुंचते ही हुआ जोरदार स्वागत
नीतीश कुमार गुरुवार को ही दिल्ली पहुंच गए थे। यहां जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया।

बिहार की राजनीति में नया अध्याय
नीतीश कुमार का यह कदम केवल व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा का नया पड़ाव नहीं है, बल्कि बिहार एनडीए के लिए एक बड़ी परीक्षा भी है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य की बागडोर किसके हाथों में जाएगी और क्या नई सरकार “नीतीश मॉडल” को उसी प्रभाव के साथ आगे बढ़ा पाएगी।
