केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर बुधवार शाम पूर्णिया पहुंचे। पूर्णिया एयरपोर्ट पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री लेशी सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया। यहां से वे सड़क मार्ग से किशनगंज रवाना हुए, जहां उन्होंने लैंड पोर्ट अथॉरिटी की समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया और रात्रि विश्राम किया।
गुरुवार को गृह मंत्री अररिया में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, जबकि शुक्रवार को पूर्णिया में सीमावर्ती जिलों से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकों के बाद वे नई दिल्ली लौटेंगे।
सीमा सुरक्षा पर मुख्य फोकस, सिलिगुड़ी कॉरिडोर अहम
वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा के मुताबिक, गृह मंत्री का यह दौरा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है। खासतौर पर सिलिगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जा रही है।
अररिया में सुबह 11 बजे लेट्टी सीमा चौकी पर आयोजित
कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वे कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसमें अवैध गतिविधियों, तस्करी और सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष जोर रहेगा।
वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम पर खास ध्यान
गृह मंत्री दूसरे चरण के वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। केंद्र सरकार सीमावर्ती गांवों के विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय आबादी को सशक्त बनाने पर जोर दे रही है।
इस योजना के तहत सड़कों, संचार सुविधाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि सीमावर्ती इलाकों से पलायन रुके और सुरक्षा भी मजबूत हो।
क्या बंगाल चुनाव से जुड़ा है दौरा?
इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा है?
वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा का कहना है कि इसे सीधे तौर पर बंगाल चुनाव से जोड़ना उचित नहीं होगा। अगर चुनाव ही मुख्य मुद्दा होता तो गृह मंत्री बंगाल में प्रवास करते। हालांकि उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जैसे सीमावर्ती जिलों के कुछ नेता उनसे मुलाकात कर सकते हैं।
सीमांचल दौरे के दो बड़े मायने
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी के अनुसार, इस दौरे के दो प्रमुख मायने निकाले जा रहे हैं। पहला, केंद्र सरकार सीमांचल क्षेत्र को घुसपैठ से मुक्त कराने पर विशेष ध्यान दे रही है। गृह मंत्री पहले भी कई बार सीमांचल में घुसपैठ और अवैध प्रवास के मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि अवैध प्रवासियों के जरिए वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।
दूसरा, सीमांचल के जिले पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे हैं। ऐसे में उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर की विधानसभा सीटों पर राजनीतिक फोकस बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। किशनगंज और पूर्णिया में रात्रि विश्राम के दौरान गृह मंत्री सीमावर्ती जिलों के नेताओं के साथ रणनीतिक चर्चा कर सकते हैं।
सुरक्षा और घुसपैठ पर मंथन
दौरे के दौरान सीमा पर सुरक्षा कैसे और मजबूत की जाए, इस पर गहन विचार-विमर्श हो रहा है। भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों, तस्करी और संदिग्ध आवाजाही को रोकने के उपायों पर भी चर्चा की जा रही है।
घुसपैठ का मुद्दा सीमांचल और बंगाल दोनों ही क्षेत्रों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय मानती है।
भाजपा का रुख: सख्ती का संदेश
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि गृह मंत्री का रुख घुसपैठ के मुद्दे पर बेहद सख्त है। पार्टी का मानना है कि अवैध घुसपैठ और आतंकवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं। तीन दिवसीय दौरे के दौरान गृह मंत्री इन्हीं मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं।
तेजस्वी यादव का पलटवार
वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस दौरे को राजनीतिक कवायद बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर घुसपैठ का मुद्दा उठाया जा रहा है।
तेजस्वी यादव का कहना है कि घुसपैठ कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है और इसे पहले भी बिहार व झारखंड चुनाव में उठाया गया था। उनके अनुसार, जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

गृह मंत्री के दौरे से सीमांचल में बढ़ी सियासी हलचल
कुल मिलाकर गृह मंत्री का यह दौरा प्रशासनिक समीक्षा के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। एक ओर सीमा सुरक्षा और विकास योजनाओं की समीक्षा हो रही है, तो दूसरी ओर सीमांचल और बंगाल की राजनीति में नई हलचल भी दिख रही है।
अब देखना होगा कि इस दौरे के बाद सीमा प्रबंधन और विकास योजनाओं को लेकर जमीनी स्तर पर क्या बदलाव दिखाई देते हैं, और सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
