बेतिया (नरकटियागंज)। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत, कानून और व्यवस्था—तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नरकटियागंज के शिकारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हड़बोड़ा नदी के तट पर एक महिला का शव ठिकाने लगाने की कोशिश करते हुए ग्रामीणों ने दो लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया। यह दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया।
रिक्शा चालक और साथी गिरफ्तार, ग्रामीणों की सतर्कता से बचा बड़ा खेल
ग्रामीणों ने देखा कि एक रिक्शा पर लादकर महिला का शव नदी किनारे लाया जा रहा है। शक होने पर लोगों ने दोनों व्यक्तियों को रोका और तुरंत शिकारपुर थाना को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान चमुआ गांव निवासी सूरदास और पोखरा चौक निवासी रामचंद के रूप में हुई है।
पूछताछ में हुआ सनसनीखेज खुलासा, रेल पुलिस पर गंभीर आरोप
पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को हिला कर रख दिया। दोनों आरोपियों ने दावा किया कि महिला की मौत रेल परिसर में हुई थी और शव को नदी में फेंकने का निर्देश रेल पुलिस के एक कर्मी ने दिया था। आरोपियों के अनुसार, रेल पुलिस के प्रेम कुमार नामक कर्मी ने उन्हें शव ठिकाने लगाने को कहा।
मृतका की पहचान पर भी सवाल, कौन थी यह बेनाम महिला?
आरोपियों ने मृत महिला की पहचान मोतिहारी जिले के चइलहा गांव निवासी तेतरी देवी के रूप में बताई, जो स्टेशन परिसर के आसपास भटककर जीवन गुजारती थी।
हालांकि, रेल पुलिस की ओर से यह कहा गया कि मृतका एक भिखारी महिला थी और उसकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। यही विरोधाभास पूरे मामले को और संदिग्ध बना देता है।
मौके पर पहुंची रेल पुलिस, शव अपने कब्जे में लिया
घटना की जानकारी मिलते ही नरकटियागंज रेल पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन की सक्रियता बढ़ी।
क्या कहती है स्थानीय पुलिस?

शिकारपुर थाना प्रभारी ज्वाला कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही एसआई जयभगवान कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम भेजी गई थी। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि रेल परिसर में महिला की मौत के बाद शव को छिपाने और नदी में फेंकने का प्रयास किया जा रहा था।
पोस्टमॉर्टम से खुलेगा मौत का राज?
रेल थाना प्रभारी राजकुमार ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं रेल एसपी वीणा कुमारी ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल डीएसपी को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
कई सवाल, जिनके जवाब अब भी बाकी
इस घटना ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब व्यवस्था को देना ही होगा—
रेल परिसर में महिला की मौत आखिर कैसे हुई?
अगर मौत स्वाभाविक थी तो शव को छिपाने की कोशिश क्यों?
क्या कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ते पाए गए?
और सबसे बड़ा सवाल—एक बेसहारा महिला की जिंदगी इतनी सस्ती क्यों थी?
इंसानियत पर काला धब्बा, अब निगाहें जांच पर
एक अनजान, बेसहारा महिला की मौत आज पूरे सिस्टम के चेहरे पर काले धब्बे की तरह उभर आई है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक मौत नहीं बल्कि व्यवस्था की हत्या होगी।
अब सवाल यही है—क्या सच सामने आएगा, या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?
