पटना। बिहार में वर्षों से आम लोगों की परेशानी का कारण बने भूमि विवादों को कम करने की दिशा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। समृद्धि यात्रा पर गोपालगंज रवाना होने से पहले सीएम नीतीश कुमार ने जमीन मापी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की घोषणा कर लाखों नागरिकों को राहत की उम्मीद दी है।
यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उस आम आदमी के दर्द को समझने की कोशिश है, जो सालों से अपनी ही जमीन के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर रहा है।
सात निश्चय-3 के तहत ‘Ease of Living’ पर सरकार का पूरा फोकस
सीएम नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा है कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार के गठन के तुरंत बाद ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ के कार्यक्रमों को लागू किया गया।
सातवां निश्चय — ‘सबका सम्मान, जीवन आसान (Ease of Living)’ — का मुख्य उद्देश्य यही है कि राज्य के नागरिकों के दैनिक जीवन की कठिनाइयों को कम किया जाए। जमीन मापी से जुड़े फैसले इसी सोच का परिणाम हैं।
जमीन मापी में देरी से बढ़ते हैं अनावश्यक विवाद
सीएम नीतीश कुमार ने माना कि अक्सर जमीन मापी के लिए आवेदन देने के बाद महीनों तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती।
इस देरी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है, जिससे:
आपसी विवाद बढ़ते हैं
कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगते हैं
परिवारों के बीच तनाव पैदा होता है
समय पर मापी न होने से जो विवाद जन्म लेते हैं, वे कई बार पीढ़ियों तक चलते रहते हैं।
विशेष भूमि मापी अभियान: लंबित मामलों का होगा निपटारा सरकार ने फैसला लिया है कि 31 जनवरी 2026 तक विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाएगा। यह अभियान उन लोगों के लिए राहत की सांस जैसा है, जिनकी फाइलें वर्षों से धूल खा रही थीं।
अब तय समय में होगी जमीन की मापी
1 अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत: अविवादित जमीन की मापी →
शुल्क जमा होने के अधिकतम 7 कार्य दिवस में विवादित जमीन की मापी → शुल्क जमा होने के अधिकतम 11 कार्य दिवस में यानी अब न तारीख पर तारीख, न अनिश्चित इंतजार।
14 दिन में पोर्टल पर अपलोड होगी मापी रिपोर्ट
सरकार ने जवाबदेही तय करते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि:
मापी पूरी होने के बाद 14वें दिन तक अमीन द्वारा मापी प्रतिवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा । इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी अंकुश लगेगा।
सरकार करेगी संसाधनों और निगरानी की पूरी व्यवस्था
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिया गया है कि:
आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति हो
संसाधनों की कोई कमी न रहे
पूरी प्रक्रिया की गहन निगरानी सुनिश्चित की जाए
यह संदेश साफ है कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी।
बिहार में आम जनता के लिए बड़ी राहत, विश्वास की नई शुरुआत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्वास जताया कि जमीन मापी प्रक्रिया को सरल बनाने की यह पहल प्रदेशवासियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
यह फैसला सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े हर परिवार की जिंदगी को आसान बनाने की कोशिश है।

जनता से सुझाव भी आमंत्रित
सरकार ने लोकतांत्रिक भावना दिखाते हुए नागरिकों से भी सुझाव मांगे हैं। यदि कोई नागरिक इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव देना चाहता है, तो 25 जनवरी 2026 तक निर्धारित माध्यमों से अपने बहुमूल्य सुझाव दे सकता है।
बिहार में जमीन विवाद केवल कानूनी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक
बिहार में जमीन विवाद केवल कानूनी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक पीड़ा का कारण रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो वर्षों से न्याय और स्पष्टता का इंतजार कर रहे थे।
यदि यह व्यवस्था ज़मीन पर उसी सख्ती और ईमानदारी से लागू हुई, तो यह निश्चय ही बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
